नवगछिया। गोपालपुर और इस्माईलपुर क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। इसी के साथ तटवर्ती गांवों में बाढ़ और कटाव को लेकर लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। दूसरी ओर जल संसाधन विभाग द्वारा कराए जा रहे कटाव निरोधी कार्यों की रफ्तार और गुणवत्ता पर स्थानीय ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर मानकों के अनुरूप बड़े बोल्डरों की जगह छोटे पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है, जबकि महत्वपूर्ण स्थलों पर अब भी कार्य अधूरा पड़ा हुआ है।


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गोपालपुर प्रखंड के तिनटंगा करारी, सैदपुर, अभिया, डुमरिया समेत कई कटाव प्रभावित गांवों में गंगा का दबाव लगातार बढ़ रहा है। हर वर्ष बाढ़ और कटाव की मार झेलने वाले ग्रामीणों का कहना है कि मानसून की शुरुआत होने वाली है, लेकिन कई जगहों पर जियोबैग लगाने और बोल्डर बिछाने का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कटावरोधी कार्य में निर्धारित मानकों के अनुरूप बड़े और मजबूत बोल्डरों के बजाय छोटे आकार के पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि गंगा की तेज धारा के सामने ऐसे पत्थर टिक नहीं पाएंगे और बह जाने की आशंका बनी रहेगी। इससे करोड़ों रुपये की लागत से चल रही परियोजना की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

सैदपुर दुर्गा मंदिर, ब्रह्मोत्तर बांध और आसपास के क्षेत्रों को लेकर लोगों की चिंता सबसे अधिक है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते गुणवत्तापूर्ण सामग्री के साथ सुरक्षा कार्य पूरा नहीं किया गया तो बरसात के दौरान गांवों, कृषि भूमि और संपर्क मार्गों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

जानकारी के अनुसार इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध पर स्पर संख्या सात से नौ तक करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से सीट पाइलिंग, बोल्डर क्रेटिंग, मिट्टी भराई और तटबंध पुनर्निर्माण का कार्य चल रहा है। वहीं ज्ञानी दास टोला और झल्लू दास टोला में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से कटाव निरोधी कार्य कराया जा रहा है। हालांकि कई स्थानों पर अभी केवल आधारभूत निर्माण कार्य ही पूरा हुआ है और बोल्डर क्रेटिंग का कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ई. गौतम कुमार ने बताया कि दोनों परियोजनाओं पर कार्यरत एजेंसियों को मजदूरों की संख्या बढ़ाने तथा निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी एजेंसी द्वारा लापरवाही बरती जाती है तो विभागीय नियमों के तहत चेतावनी, आर्थिक दंड और काली सूची में डालने जैसी कार्रवाई की जाएगी।

गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच अधूरे कटावरोधी कार्य तटवर्ती गांवों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने और सभी लंबित कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा कराने की मांग की है, ताकि संभावित बाढ़ और कटाव से लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

By न्यूज़ डेस्क

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