जमुई: मलयपुर स्थित मां कालिका मंदिर की पूजा पूरे जिले में प्रसिद्ध है। पूजा के दौरान पूरे जिले के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।
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1986 में हुई थी शुरुआत

यू तो मलयपुर स्थित मां कालिका पूजा का कोई खास ऐतिहासिक महत्व नहीं है परंतु अद्भुत सजावट व शालीन पूजा ने इसे जिले में प्रसिद्धि दिला दी। सन् 1986 में मलयपुर निवासी अशोक कुमार सिंह की पहल पर मलयपुर में मां काली की पूजा शुरू की गई। इसके लिए ग्रामीणों ने यथा शक्ति सहयोग दिया। कहते हैं कि उस समय रात-दिन एक-सी भीड़ लगी रहती थी। लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते थे। इसी प्रकार कुछ वर्षो तक पूजा कार्यक्रम चलता रहा। फिर स्थायी मंदिर का निर्माण शुरू किया गया और आज मां काली की पूजा भव्य मंदिर में होती है। पूजा के दौरान दूधिया रंग का मंदिर प्रत्येक रात्रि एक नए रंग की रोशनी में रोशन होती है।
दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
मंदिर की प्रसिद्धि ऐसी है कि पूजा के दौरान अंतर जिला के श्रद्धालु आते हैं। सड़क व रेल मार्ग सुगम होने से ग्रामीण क्षेत्र के अलावा अलीगंज, झाझा, सिमुलतला, लक्ष्मीपुर के लोग दर्शन को आते हैं वहीं दूसरे जिले के खड़गपुर, मननपुर, बंशीपुर, लखीसराय तक के श्रद्धालु जुटते हैं।
आनंद में डूब जाता है पूरा इलाका
मां कालिका पूजा के अवसर पर प्रत्येक वर्ष नवंबर में मलयपुर में वृहत मेले का आयोजन होता है।
