नवगछिया : अंतत: नवगछिया की लीची इस बार भी मौसम की मार का शिकार हो गयी है. समय से बरसात नहीं होने के कारण खास कर मनराजी लीची के दाने पुष्ट नहीं हुए. लिहाजा देश विदेश के बाजारों में नवगछिया की लीची औंधे मुंह गिर गयी. वर्तमान में नवगछिया में लीची का बाजार मूल्य छ: सौ रूपये से आठ सौ रूपये प्रति हजार है. दूसरी तरफ बगीचे में किसानों से चार सौ रूपये से छ: सौ रूपये प्रति हजार के दर से किसानों को मूल्य मिल रहा है. ऐसी स्थिति में इलाके के किसान एक बार भी पेट के बल हैं और उनका कोई भी सुनने वाला नहीं है.
– छ: से आठ सौ रूपया प्रति हजार है बाजार दर
– समय पर नहीं हुई बरसात, मनराजी नहीं हुई रसीली
– किसानों को नहीं मिल रहा रेट
ठीक ठाक थी लीची की फसल
स्थानीय किसानों का कहना है कि लीची की फसल इस बार ठीक ठाक थी. मंजर जरूर कम आये थे लेकिन जितना था ठीक ठाक था. देशी प्रजाति की लीची को अच्छा खास भाव मिला लेकिन जब मनराजी की बारी आयी तो किसान आसमान की ओर आस लगाये बैठे रहे और बरसात नहीं हुई. अगर समय से दो बरसात भी हो जाती तो मनराजी प्रजाति की लीची की रंगत ही कुछ और होती. देश विदेश के बाजारों में भी नवगछिया की लीची के बजाय इन दिनों दूसरे इलाकों की लीची को अधिक मूल्य मिल रहा है.

किसानों ने कहा
इलाके के लीची किसान तुलसीपुर के अजीत कुमर उर्फ पूको कुमर, नलीन राय उर्फ बुग्गी राय, सोनू राय, जिला पार्षद गौरव राय, जयरामपुर के किसान ललन कुमर, ध्रुवगंज के किसान पूर्व सरपंच पिंकू कुमर आदि अन्य ने कहा कि शुरूआती समय में उन लोगों को लगा कि इस बार लीची की फसल से अच्छी खासी कमाई होगी लेकिन बरसात नहीं होने से लीची की फसल को नुकसान हुआ और उनलोगों को इस बार भी नहीं के बराबर मुनाफा हुआ.
एक अदद औद्योगिक इकाई की जरूरत
वार्ड संघ के प्रखंड उपाध्यक्ष सज्जन भारद्वाज, मौजमा निवासी भाजपा के जिला मंत्री गौरव कुमार, प्रभु प्रिंस, विक्रांत वैभव, अली अहमद आदि ने कहा कि वर्षों से इलाके के किसान मांग कर रहे हैं कि इलाके में फल आधारित उद्योग की स्थापना हो लेकिन आज तक जितने भी प्रतिनिधि आये सबने इसे ठंडे बस्ते में डालने का काम किया है. अगर इलाके में इस तरह की औद्योगिक इकाई हो तो निश्चित रूप से किसान कम या कमतर उत्पादन करके भी मुनाफा पा सकते हैं. इसके लिए संघर्ष का आगाज किया जायेगा.


