मां दुर्गा की सवारी नवरात्रा शुरू होने और समाप्त होने वाले दिन पर निर्भर करता है। इस बार मां दुर्गा नौका पर आएंगी और नर वाहन पर जाएंगी। नौका पर आगमन से बारिश की संभावना, जन-धन की हानि होने की संभावना है। राजनीतिक स्थिरता का योग प्रबल है। नर वाहन पर प्रस्थान करने से सुख-समृद्धि होगी और शुभ कार्य के प्रति लोगों का झुकाव होगा। शुभ कार्यों में सफलता मिलेगी और कामनाओं की पूर्ति होगी।

इस बार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा बुधवार 10 अक्टूबर से नवरात्रा आरंभ होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानंद पाण्डेय ने बताया कि प्रत्येक वर्ष मां भगवती के आगमन और प्रस्थान अलग-अलग वाहन से होता है। यदि रविवार और सोमवार को पूजा आरंभ होती है तो उस वर्ष मां हाथी पर आती हैं, शनिवार और मंगलवार को पूजा शुरू होने पर घोड़े पर, गुरुवार और शुक्रवार रहने पर मां डोली पर एवं बुधवार के दिन पूजा शुरू होने पर नौका पर मां दुर्गा आती हैं।

मां दुर्गा के जाने के लिए निर्धारित सवारी के बारे में मान्यता है कि विसर्जन के दिन यदि रविवार और सोमवार रहे तो देवी भैंसे पर जाती हैं। शनिवार और मंगलवार को चरणायुद्ध यान पर जाती हैं। बुधवार और शुक्रवार को गज वाहन पर और गुरुवार रहने पर नर वाहन पर भगवती प्रस्थान करती है। मां दुर्गा के अशुभ वाहन पर आगमन और प्रस्थान का प्रभाव कभी शुभ और कभी अशुभ भी होता है। दिन के अनुसार लोग आने वाले समय कैसा बीतेगा इसका भी अनुमान लगाते हैं।

प्रतिपदा 10 अक्टूबर को चित्रा नक्षत्र वैघृति योग में

इस बार शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 10 अक्टूबर चित्रा नक्षत्र वैघृति योग तुला राशि में कलश स्थापन और नवरात्र आरंभ हो रहा है। ज्योतिषाचार्य अजीत पाण्डेय ने बताया कि काशी पंचांग के अनुसार बुधवार सुबह 7:56 और मिथिला पंचांग के अनुसार सुबह 7:51 मिनट तक है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:37 मिनट से 12:23 मिनट के बीच है। यह वृश्चिक राशि में पड़ रहा है। इस बार पहली पूजा से लगातार नौ दिनों तक दुर्गा के नौ रूपों की अलग-अलग पूजा-अर्चना होगी।

16 अक्टूबर को खुलेंगे मां के पट

16 अक्टूबर मंगलवार को सप्तमी का प्रवेश काशी पंचांग के अनुसार सुबह 8:54 और मिथिला पंचांग के अनुसार सुबह 8:48 मिनट पर होगा। इस इस दिन मां के पट खुलेंगे, पत्रिका प्रवेश, निशा पूजा, भगवती का आह्वान होगा। 17 अक्टूबर बुधवार को महाष्टमी का प्रवेश काशी पंचांग के अनुसार 16 अक्टूबर मंगलवार सुबह 10:32,मिथिला पंचांग के अनुसार सुबह 10:27 बजे तक है। महाष्टमी का समापन क्रमश: काशी पंचांग बुधवार 17 अक्टूबर सुबह 12:27, मिथिला पंचांग के अनुसार सुबह 12:22 बजे तक है। महाष्टमी पूजा, महाष्टमी व्रत होगी। इसके पूर्व 16 अक्टूबर मंगलवार को निशा पूजा सुबह 11:37 से दोपहर 1:55 बजे तक। 18 अक्टूबर गुरुवार को महानवमी अपराह्न 2:32 तक है। इस दिन महानवमी पूजा, त्रिशूलनी पूजा, बलि, हवन पूजन होगा। 19 अक्टूबर शुक्रवार को विजया दशमी है।

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By न्यूज़ डेस्क

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