इस दिन गणेश जी को विधिवत वस्त्र और उपनयन से सजा कर उचित आसन देकर विधिवत पूजन कर के स्थापित करते हैं। मध्यान्ह काल में पूरे विधि विधान स गणेश पूजन किया जाता है। इस दिन भक्त पूरे पांडाल को सजाते हैं। श्री गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए उनको गीत और संगीत के माध्यम से भजन का सुंदर प्रस्तुतीकरण किया जाता है। मंत्रों के मधुर उच्चारण से पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। यह उत्सव 10 दिन चलता है फिर अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन कर देते हैं।
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गणेश चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथि 12 सितंबर को 4 बजकर 7 मिनट से प्रारंभ होकर 13 को 2 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। 13 सितंबर को 11 बजकर 08 मिनट से 2 बजकर 34 मिनट तक पूजा का श्रेष्ठ मुहुर्त है।

ये बरतें विशेष सावधानी
गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन कदापि न करें वरना कलंक मिल सकता है। इस पर्व पर चंद्र दर्शन करने से मिथ्या दोष लगता है। भगवान कृष्ण पर स्यमन्तक नामक बहुमूल्य मणि की चोरी का कलंक इस चंद्र दर्शन के कारण ही लगा था। इस प्रकार गणेश चतुर्थी का व्रत पूर्ण श्रद्धा से रहते हुए गणेश जी की पूजा करने से सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। व्यवसाय में सफलता मिलती है। शिक्षा तथा प्रतियोगिता में छात्र सफलता की प्राप्ति करते हैं। जिनका व्यवसाय बंद पड़ा है वे भी पूजा करें।

भाद्र शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय जन्मे थे गणेश
गणेश बुद्धि के देवता व विघ्न विनायक हैं। ये देव समाज में सर्वोपरि स्थान रखते हैं। पंडित विजयानंद शास्त्री ने बताया कि प्राचीन काल में बालकों का विद्या-अध्ययन आज के दिन से ही प्रारंभ होता था। गणेश का पूजन सायंकाल में करने के बाद चन्द्रमा को अर्घ्य देना चाहिए।

