नवगछिया : श्रावण मास के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि से लगातार श्रावण शुक्लपक्ष तृतीया तिथि तक नवविवाहिता द्वारा मधुश्रावणी व्रत पूजी जाती है।यह पूजा व्रती अपने मायके में पूजती हैं। नवविवाहित व्रती शिखा विश्वास ने बताया की यह एक विशेष पूजा होती है।
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जिसमें भगवान गणेश, गौरीशंकर, हाथी एवं नाग-नागिन की भी पूजा होती है। कथकही पंडिताईन से कथा सुनी जाती है। इसमें नवविवाहिता के ससुराल से पूजन व भोजन की सभी सामग्रियाॅ आती है।

अंतिम दिन विवाहित औरतों के बीच मेहंदी, सिंदुर, कुमकुम आदि बाॅटने का रिवाज है। अंतिम दिन कथा के अंत में जलते हुई बाती से शरीर पर तीन स्थानों पर टेमी दागने की भी परम्परा है। अंतिम दिन विवाहित औरतों को दूध से बनीं खीर का भोजन करायी जाती है।

