नवगछिया : नवगछिया नगरह बिन्द टोली रामनगर घाट के पास रविवार को कोसी नदी में हुआ नौका हादसा अब तक का सबसे बड़ा हादसा है. सात बच्चों के लापता होने की खबर इलाके में फैलते ही इस घटना ने आम लोगों को पूरी तरह से झकझोड़ दिया है. एक तरफ हम बुलेट ट्रेन की बात कर हैं तो दूसरी तरफ आज भी समाज का एक वर्ग याता यात के साधानों के लिए डेंगी नाव से जान को जोखिर में डाल कर यात्रा कर रहे हैं. स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर क्यों नवगछिया के विभिन्न घाटों पर प्रशासनिक नजर रहती है.


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मालूम हो कि नवगछिया अनुमंडल की 30 फीसदी आबादी का नदी के साथ प्रत्यक्ष सरोकार है. चाहते हुए या फिर न चाहते हुए भी तटवर्ती इलाके में रहने वाले लोगों को नौका से यात्रा करना मजबूरी है. मालूम हो कि नवगछिया में अब तक हुई दुर्घटना में अधिकतम चार लोगों के हताहत हुए थे. नवगछिया अनुमंडल में इस्माइलपुर प्रखंड में पिछले 5 वर्षों में हुए नौका हादसे में 35 लोगों की जानें गई है. जबकि खरीक प्रखंड के में गंगा कोसी नदी में हुए नौका हादसे में 15 लोगों की जान जा चुकी है. वही नवगछिया रंगरा प्रखंड में पिछले 5 वर्षों में 2 दर्जन से अधिक लोगों की जान गई है.

नवगछिया में प्रशासनिक पदाधिकारी या जनप्रतिनिधि उस समय जागरूक होते हैं जब कोई नौका हादसा हो जाता है. वर्ष 2015 में इस्माइलपुर प्रखंड में हुए नौका दुर्घटना तीन लोगों की जान जाने के बाद प्रशासनिक स्तर से नौका का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया था. इसके पूर्व वर्ष 2013 में नवगछिया के पुनमा प्रताप नगर कोसी घाट पर नौका दुर्घटना में दो लोगों की जानें गई थी। वहीं पिछले वर्ष बिहपुर प्रखंड के मड़वा में डूबने चार लोगों की मौत हुई थी. नवगछिया में हर वर्ष नौका दुर्घटना एवं डूबने से दर्जनों लोगों की जान जाती है. हर हादसे में बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता जाग्रत होती है लेकिन समय बीतने के साथ ही इस तरह की हादसों की सजगता को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है.

By Rishav Mishra Krishna

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