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नवगछिया : नवगछिया के गंगा कोसी दियारा में गंगा से जमीन निकलते ही रक्त पात आम बात है. विगत एक दशक से इसमें कुछ कमी आयी है लेकिन तीनटंगा झल्लूदास टोला की घटना के बाद कहा जा सकता है कि कहीं नवगछिया अपने पुराने राह पर न चल पड़े. मालूम हो कि नदी के ओट से हर साल जमीन निकलती है. इस तरह की जमीन का प्रशासनिक स्तर से कोई रिकार्ड नहीं रहता है. लिहाजा जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत चरितार्थ होती है. नवगछिया के खरीक के कोसी दियारा, हरियौ कोसी दियारा, नवगछिया कोसी दियारा में 1990 के दशक में हुए नरसंहार का मुख्य कारण यही था. यहां तक की वर्ष 2005 में हुए विनोवा नरसंहार की घटना का तात्कालिक कारण जो भी रहा हो लेकिन स्थाई कारण दियारा के सैकड़ों भू भाग में फैले उपजाउ जमीन ही था.

चित्कार करते रहे लोग लेकिन दबंगों को दया न आयी

ग्रामीणों ने कहा कि वे लोग उक्त पड़ती जमीन पर अपने मवेशियों को रखते हैं और किस तरह से अपना गुजर बसर करते हैं. सुबह गांव के सभी लोग अपने अपने काम में व्यस्त थे. तभी मौके पर 15 से 20 लोग आ धमके. वे लोग कुछ समझ पाते ही सबों ने जमीन खाली करने को कहने लगे. कुछ युवकों ने इस बात का विरोध किया तो हरवे हथियार के साथ आये लोगों ने बेरहमी से मारपीट करना शुरू किया. पति को बचाने जो भी महिलाए सामने आ रही थी उनको जोर दास तमाचा मारा जाता था. रो रहे बच्चों पर फुटबॉल के तरह किक लगाया जाता था. तभी करीब पांच से छ: की सख्या में लोगों ने झोपड़ियों में घुस कर मिट्टी तेल निकाला और एक तरफ से सभ झोपड़ियों में आग लगा दी. ग्रामीण कहते हैं कि इसके बाद तो पूरे टोले में चीख पुकार चित्कार का माहौल था. अपराधी झोपड़ी पर ढ़ेला मार कर आग को यत्र तत्र कर रहे थे. कुछ अपराधी ताबरतोर फायरिंग करते जा रहे थे. इसके बाद उन लोगों ने भाग कर ही जान बचायी.

आखिर किसकी है दस एकड़ जमीन

गंगा के कोख से निकली दस एकड़ जमीन किसकी है. इसका सटीक जबाव किसी के पास नहीं है. लेकिन एक बात तो तय है कि इस जमीन पर रह रहे लोग आर्थिक रुप से काफी विपन्न हैं. सबों के आय का जरिया पशुपालन है. करीब सौ परिवार उक्त जमीन पर रह कर किसी तरह अपनी जीविका चलाते हैं. यहां रह रहे लोगों में 50 फीसदी लोग बेघर हैं  उन्हें अपनी जमीन नहीं है. भाकपा माले के कामरेड बिंदेश्वरी मंडल ने घटना के बाद मोरचा खोल दिया है. श्री मंडल ने कहा कि उक्त जमीन पर अगर बेघर और आर्थिक रुप से विपन्न लोग रह रहे थे तो गांव के दबंगों का क्या जाता था. कामरेड बिंदेश्वरी मंडल ने कहा कि पुलिस जल्द से जल्द सभी अपराधियों को गिरफ्तार करे अन्यथा माले चरण बद्ध आंदोलन करने को मजबूर हो जायेगा. इधर कामरेड प्रणेश समदर्शी ने कहा कि इस घटना की जितनी निंदा की जाय कम है. इस तरह क ी घटना प्रशासनिक सुस्ती का परिणाम है. बेघरों को उसी जमीन पर विधिवत बसाया जाय और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाय अन्यथा वे लोग आंदोलन करने को बाध्य हो जायेंगे.

By Rishav Mishra Krishna

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