खरीक : मुकेश शाह की हत्या होने से पूरी तुलसीपुर का वातावरण गमगीन हो गया है. महिलाओं के चित्कार से चारों तरफ मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है. लोगों की जुबां पर एक ही सवाल आखिर मुकेश की हत्या क्यों और किसने कर दी. लोगों को यकीन नहीं हो रहा था कि मुकेश इस संसार में नही रहा. मृतक की मां और बूढ़े पिता विनोद साह का रोते रोते बुरा हाल है. घटना की सूचना मिलने के बाद से मुकेश के पिता विनोद साह का बुरा हाल है.
अब मेरा लाल कौन बनेगा बुढ़ापे का मेरा सहारा कौन बनेगा. इस तरह के सवालों के जवाब ढूंढते-ढूंढते बूढ़ा पिता विनोद साहनी शुद्ध हो जाता है. अब मेरी देख रहे कौन करेगा. बुढ़ापा कैसे कटेगी. पुत्र की मौत से पहले मुझे उठा लेता. विश्वसनीयता और काम के प्रति समर्पित होने के बदौलत ही मुकेश अपने मालिक का चहेता बन गया था. पेट्रोल पंप पर भी मुकेश का व्यवहार अन्य कर्मियों से काफी बेहतर था. इसलिए लोग उसे चाहते थे. मालिक का सबसे प्यारा था.
गांव में उसका किसी से दुश्मनी नहीं था. मुकेश ने बीते 5 साल पूर्व श्याम पेट्रोल पंप में बतौर कर्मी के रूप में काम शुरू किया था. आपने अच्छे काम और विश्वासपात्र होने के कारण मुकेश अपने साथियों में से सबसे अधिक विश्वासपात्र और मालिक का चहेता हो गया. वह महज एककर्मी के कार्य दायित्व को पूरा करते हुए पंप का प्रबंधकीय कार्य करने लगा था. पेट्रोल पंप पर कलेक्शन करने के बाद रकम बैंक में जमा भी करता था. ढेर सारे दायित्वों का निर्वहन वह एक साथ करने लगा था. कई कर्मी मन-ही-मन नाराज भी रहता था. इतने कम समय में अपने कार्य व्यवहार की बदौलत अच्छे मुकाम पर पहुंच जाना अपने सहकर्मियों को रास नहीं आ रहा था.
अन्य कर्मी इस तरह की खींज मुकेश के सामने भी अभिव्यक्त करने लगा था. मुकेश शाह को पता नहीं था कि शुक्रवार की रात उसकी जिंदगी की आखिरी रात साबित होगी. मुकेश दो भाइयों में सबसे बड़ा था. पूरे परिवार का दायित्व मुकेश पर ही था. परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से मुकेश शुरू से ही परिवार की आर्थिक स्थिति को ठीक करने में लगा था. मुकेश अपने पीछे वृद्ध माता पिता छोटा भाई अनिल पत्नी कंचन देवी 5 पुत्री ज्योति, दीपा, खुशी, अजनवी, लक्ष्मी और एक पुत्र ओमप्रकाश को पीछे छोड़ गया था.
15 दिन पूर्व पुत्र ओमप्रकाश का किया था मुंडन
मुकेश ने अपने सबसे चहेते पुत्र ओमप्रकाश का मुंडन बीते 15 दिन पूर्व खगड़िया पसराहा के डेउथा मंदिर में पूरे विधि विधान के साथ संपन्न कराया था. अपने पुत्र और पुत्रियों से मुकेश ढेर सारी उम्मीदों को संजोए थे. जिस पर नकाबपोश अपराधियों की बुरी नजर लग गई.


