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रिंकू कुमार झा : नवगछिया, एक लेखक से पूछा जाय, जीवन में आप किसे महत्वपूर्ण समझते हैं जवाब होगा कलम । वो कलम जो स्वतंत्र है, जिसका कोई जाति नहीं है,  जिसने शब्दों का विभाजन नहीं देखा, जिससे न्याय के सिद्धांत को परिभाषित किया, जो आरक्षण से कोसो दूर तुणीर में पड़ा बाण है, जिसने गीता, रामायण, महाभारत, वेद, कुराण, बाईबिल, को पहचान दिया । आज उसे पहचान की आवश्यकता है । लेखक के पास वह लेखनी है जिससे न्यायपूर्ण पांडव और कौरव को बराबर जगह दिया । जो ईश्वर से भी नहीं डरता था । जिसने कृष्ण तक को छलिया कहा । आज कल वैसे लेखको की कमी है । यहाँ लेखक रावण को राम बनाने पे तुले हैं । मुझे भी लेखक के सोच पे हँसी आता है पूछना चाहता हूँ कलम का वो कौन सा बूँद होगा जिससे राम लिखा जायेगा । लेखक को कोई बताये पूरक क्या होता है लेखनी तभी स्वतंत्र हो सकता है । तभी यह गुलामी टूट सकता है ।

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By Rishav Mishra Krishna

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