खरीक : खरीक थाना क्षेत्र के नरकटिया और बिहपुर थाना क्षेत्र के गौरीपुर से बीते 13 नवंबर को लापता प्रदीप कुमार झा श्रवण कुमार छोटू कुमार और प्रतिनिधि : खरीक थाना क्षेत्र के नरकटिया और बिहपुर थाना क्षेत्र के गौरीपुर से बीते 13 नवंबर को लापता प्रदीप कुमार झा श्रवण कुमार छोटू कुमार और सौ सौरभ कुमार उर्फ कारे राय की गोली मारकर सामूहिक रुप से हत्या कर लाश को गंगा नदी में बहा देने की सनसनीखेज मामले में बीते 11 दिन से गंगा नदी में गहन खोजबीन करने के बाद गुरुवार को गोपालपुर थाना क्षेत्र के तीन पहाड़ के समीप गंगा में एक युवक की लाश बरामद हुई है जिसे सौरव कुमार उर्फ कारे राय केशव के रूप में पहचान की गई है.

वॉलीबॉल का नेशनल प्लेयर सौरभ की लाश मिलने से गौरीपुर के खेल प्रेमियों मेंकोहराम मच गया है. सौरभ की मां राजू देवी और पिता राम किशोर राय उर्फ बिजली राय का बीते 11 दिनों से रोते-रोते बुरा हाल है. मां तो बिल्कुल बेसुध हो चुकी है. सुध आने पर बुदबुदाते हुए एक ही आवाज निकलती है मेरा लाल कहां चला गया मुझे छोड़ के.मां को अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि उसका लल्ला अब इस दुनिया में नहीं रहा. हत्या की खबर सुनते ही सौरभ की मां जमीन पर ही लेटी सिसक रही है. लाश मिलने की सूचना मिलते हैं मां और पिता अपने पुत्र की एक झलक पाने को लालायित हो गई.

13 तारीख से ही लापता लाडले की सकुशल वापसी की बाट जोह रहे सौरभ की मां राजू देवी और पिता बुंदेली राय की आंखें पथरा गई. नेशनल प्लेयर सौरभ की लाश मिलने की खबर से आस-पास के गांव में मायूसी छा गई है सब तरफ एक ही चर्चा लड़का होनहार था सौरव जब वॉलीबॉल खेलता था तुम लोग उसे देखते ही रह जाते थे. वह अपने खेल से दर्शकों को मोह लेते थे. इसलिए सौरव गांव में सबों का चहेता था. परिजन बताते हैं उसके बेटे का किसी से कोई दुश्मनी नहीं था फिर कोई इसे इतनी बेरहमी से क्यों मारेगा. अभी भी परिजनों को यकीन नहीं हो रहा है के उस के लाडले का शव मिल गया है

पांच भाई बहनों में सौरभ सबों का दुलारा था

गौरीपुर के बुल्ली राय और राजो देवी के पांच पुत्र पुत्रियों में सौरभ उर्फ कारे सबसे छोटा होने की वजह से सबों का प्यारा और दुलारा था.
वॉलीबॉल का नेशनल प्लेयर था सौरभ

गौरीपुर का युवक सौरभ कुमार उर्फ कारे राय खेल के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने के लिए परिश्रम कर रहा था.गौरीपुर के वॉलीबॉल ग्राउंड में सुबह जगकर सौरव अपने साथियों के साथ वॉलीबॉल का प्रैक्टिस करता था. परिजन बताते हैं के वॉलीबॉल में कैरियर बनाने का उस पर जुनून सवार था. लेकिन परिजनों को क्या पता कि उसका पुत्र एक दिन इसी वॉलीबॉल के खेल के चक्कर में अपना जान गवा बैठेगा.

 

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By Rishav Mishra Krishna

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