दोल्बज्जा : यूको बैंक ढोलबज्जा में कई दिनों से पैसे निकासी नहीं होने के कारण, ज्यों ही लोगों को पता चला आज मंगलवार के दिन पैसे की निकासी होगा, तो सैकडों की संख्या में हर दिन की तुलना सबसे ज्यादा लोगों भीड उमड पडी. लोगों की भीड इतनी अधिक हो गई कि अंदर से बाहर तक करीब सौ मीटर के दायरै में सडकों पर, महिला व पुरुषों की लम्बे-लम्बे कतार लग गई. बैंक गेट पर लोग काफी सोरगुल व धक्का-मुक्की करते हुए किसी तरह अंदर प्रवेश करता रहा. किसी के सर में चोट तो किसी के हाथ-पैर में मोच खाकर छिला जाती थी. जिसके पास धकेल कर जाने का अपना बल था वो किसी तरह अंदर घुस पाता था, नहीं तो वे देखते रह जाता था; और बोलता था बाबु कैसे भुखे-प्यासे रहेंगे. कोई उधार भी देने को तैयार नहीं है. मालपुर निवासी सुमित्रा देवी बोली- घर में बच्चे बीमार हैं, खेत ऐसे परती पडा है. गाडी वाले को कहते हैं जोतने तो पहले पैसा मांगता है। रोजी-मजदूरी करके कमाया अपना बैंक में रखा धन भी आज किसी काम का नहीं है. वहीं लालगंज निवासी मंजू देवी पेट दर्द से कहरते हुए बोली बैटा एक भी रुपया पास में नहीं है. पैसे के आभाव में डॉक्टर ने ईलाज भी नहीं किया. बेसहारा सूरदार चन्द्रदेव सिंह जो किसी तरह लाठी के सहारे चल कर आया था वे भी खिडकी को टोहते हुए बैंक कर्मी से पैसे की मांग घंटों से खडा होकर कर रहा था लेकिन उसे भी देखने वाला कोई नहीं था. पैसे के कारण ईलाज के आभाव में कल लूरी दास टोला निवासी महाबीर के पत्नी की मौत हो गई. उनके परिजन कई दिनों से बैंक का चक्कर काट रही थी. मालूम हो कि पहले बैंक कर्मी तीन कांटरों पर पैसे जमा लेता था. जब देने की वक्त आई है तो मात्र एक हीं कांटरों से निकासी कर रहे हैं. कुल चार काउंटर पर हीं काम होता है। नोट बदलने का काम यहाँ नहीं होता है. निकासी में सिर्फ 2000 रुपये करके ही दिया जा रहा है. ऐसे में लोगों के जरूरत के हिसाब से कोई भी काम होने की गुंजाइश नहीं दिख रही है. इस पार में करीब चार ग्रमीण डाक घर हैं. वहां भी यदि पैसे बदला या जमा किया जाय तो काफी हद तक लोगों की भीड हट सकती है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है.

