भोपाल. शनिवार और रविवार पति घर का काम करेगा और पत्नी बाहर का। किसी एक के बीमार पड़ने पर परिवार के लिए होटल से खाना आएगा। कुछ इस तरह की शर्तें लिखकर उसे कानूनी जामा पहनाने के लिए दंपती जिला विधिक प्राधिकरण पहुंचे। अभी तक प्राधिकरण में महिलाएं पति और ससुराल वालों के खिलाफ शिकायत लेकर पहुंचती थीं। प्राधिकरण में पहली बार ऐसा जोड़ा पहुंचा जिसने अपने झगड़े को कुछ शर्तों पर खत्म कर दिया। दोनों सभी शर्तों को सौ रुपए के स्टाम्प पेपर पर लिख कर प्राधिकरण पहुंचे। प्राधिकरण के सचिव ने दोनों के समझौते का सम्मान करते हुए प्रकरण को जिला काेर्ट भेज रहे हैं, ताकि समझौते पर कानूनी मोहर लग सके।

प्राधिकरण के सचिव न्यायधीश आशुतोष मिश्रा ने बताया कि उनके यहां अभी तक ऐसे मामले आते हैं, जिसमें पति ने पत्नी को बाहर निकाल दिया। पत्नी ने ससुराल वालों के खिलाफ प्रकरण लगा दिया। पहली बार ऐसा एक जोड़ा पहुंचा, जिसने पांच साल से चल रहे झगड़े को समझदारी से सुलझा लिया। उन्हें इसके लिए न तो वकील की जरूरत पड़ी, न कानूनी हस्तक्षेप की। पति और पत्नी दोनों निजी कंपनी में एक्जीक्यूटिव पोस्ट पर हैं। दोनों की शादी को 10 साल हो चुके हैं। उन्होंने आपस में कुछ शर्तों के आधार पर समझौता कर लिया। समझौता तोड़ने पर दोनों ने खुद के लिए सजा का प्रावधान भी किया है।

पति-पत्नी की शर्तें… एक दूसरे के माता पिता के संबंध में नहीं करेंगे छींटाकशी

पांच दिन पत्नी खाना बनाएगी और घर की देखभाल करेगी। शनिवार-रविवार को पति खाना बनाएगा, घर की देखभाल के साथ बच्चों के स्कूल का होमवर्क कराएगा। इस दौरान किसी एक के बीमार पड़ने पर बाहर से खाना आएगा।
एक दूसरे के प्रोफेशनल रिलेशनशिप पर कोई टीका-टिप्पणी नहीं करेगा।

ऑफिस में लेट घर पहुंचने की सूचना दो घंटे पहले एक-दूसरे को देना होगी, ताकि कोई एक घर पहुंचकर बच्चों को संभाल सके।
दोनों एक दूसरे के माता-पिता के संबंध में कोई छींटाकशी नहीं करेंगे और न हस्तक्षेप। दोनों अपने माता-पिता के लिए भरण पोषण की राशि अपने इच्छानुसार दे सकेंगे।

बच्चों के भविष्य के लिए दोनों अपने अकाउंट से कुछ राशि जमा कराएगें।
बच्चों के स्कूल में होने वाली पैरेंट मीटिंग एक माह पत्नी अटेंड करेगी व एक माह पति। कोई भी एक यदि टूर पर होगा, तो सूचना 5 दिन पहले देंगे।

घर का खर्च दोनों ही बराबरी से उठाएंगे।
जो मकान खरीदा है वह बच्चों के नाम पर कर दिया जाएगा संयुक्त रूप से।

खुद के लिए दंड का प्रावधान

शर्तों का कोई भी उल्लंघन करता है तो एक दूसरे से अलग होने के लिए स्वतंत्र है।
बच्चे शर्तों का उल्लंघन करने वाले के साथ नहीं रहेंगे। उल्टे बच्चों का भरण-पोषण के लिए 20 हजार रुपए हर माह देना होगा।

नियम… प्राधिकरण में पहुंचने वाले केसों में पति-पत्नी की काउंसलिंग करके समझौता कराया जाता है। यहां होने वाले समझौते के बाद किसी भी कोर्ट में सुनवाई नहीं होती।

बच्चों की खातिर किया समझौता… मिश्रा ने बताया कि दंपती के दो बच्चे हैं, जो दोनों के झगड़ों की वजह से परेशान थे। 6 वर्षीय लड़की पिता के पास रह रही थी और 8 वर्षीय लड़का मां के पास। दोनों भाई बहन केवल रविवार को एक साथ वक्त गुजारते थे। अलग होने पर दोनों तीन-चार दिन सामान्य नहीं हो पाते थे। दोनों ने बच्चों की खातिर एक बार फिर परिवार बचाने के लिए आखिरी मौका खुद को दिया।

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By न्यूज़ डेस्क

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