भागलपुर के घोघा में एनएच 80 पर अंग्रेजों द्वारा बनाये गये मसाढ़ू पुल को सोमवार को ध्वस्त कर दिया गया। पुल तोड़ने में करीब पांच घंटे लगे। इस दौरान कहलगांव से भागलपुर की ओर जाने वाली छोटी गाड़ियों को भी गोलसड़क चौक से ही भाया सन्हौला-गोराडीह होते हुए अस्थायी बायपास के रूप में मोड़ दिया गया था। इसके लिए गोलसड़क पर मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई थी।
Total Downloads: 176
गोलसड़क पर तैनात मजिस्ट्रेट बाल गोपाल शर्मा ने बताया कि हमलोगों को अस्थाई रूप से परिचालन व्यवस्था देखने के लिए तैनात किया गया है। अगले आदेश तक यातायात रोका गया है। 10 जनवरी के बाद संभवत: विकल्प के रूप में यातायात चालू करने के आदेश मिलने की संभावना है। मालूम हो कि बीते साल ही मसाढ़ू पुल में दरार आने से खतरनाक हो गया था। इसके बाद से इस पुल पर भारी वाहनों का परिचालन बंद कर दिया गया था। भारी वाहनों के परिचालन के बाद सभी भारी वाहन गोलसड़क से ही सन्हौला होते हुए भागलपुर पहुंचते है। इस कारण 50 किलोमीटर ज्यादा दूरी चालकों को तय करनी पड़ती है।

पुल टूटने के निर्धारित समय से पहले ही लोग सतर्क हो गये थे। इसलिए सड़कों पर वाहन कम चल रहे थे। लोगों की आवाजाही भी अपेक्षाकृत काफी कम रही। यह पुल प्राचीन विक्रमशिला खुदाई स्थल, एनटीपीसी, बटेश्वर स्थान व झारखंड सीमा में प्रवेश के लिए महत्वपूर्ण था। मसाढ़ू पुल को ध्वस्त करने में लगभग पांच घंटे लगे। सुबह 10.30 बजे पुल तोड़ने कार्य आरम्भ हुआ, जो 3.30 बजे तक चला।

