भागलपुर: छोटी चोरी और लूटपाट कर जरायम की दुनिया में प्रवेश करने वाले दिनेश मुनि को सूबे के एक कद्दावर नेता का संरक्षण मिला हुआ है। उसे वर्ष 2014 से राजनीतिक संरक्षण मिलना शुरू हुआ। इसके बाद इलाके के इस मामूली छनौटिए ने बाकायदा एक गिरोह ही खड़ा कर लिया।

ऐसी चर्चा है कि सूबे में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बाद उक्त नेता के संरक्षण में ही दिनेश मुनि ने खगडिय़ा और नवगछिया के अलावा मधेपुरा, पूर्णिया और अररिया जिले में भी शराब बेचने का नेटवर्क तैयार कर लिया। दियारा में शराब की डंपिंग और लोकल मेड इंग्लिश और देसी दारू भी तैयार कराने लगा। दिनेश मुनि के इस नेटवर्क की जानकारी पसराहा थानाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह को लग चुकी थी। दिनेश और उसके साथियों के साथ मुठभेड़ के पूर्व उसे दबोचने की बेताबी आशीष में थी। दिनेश के पकड़े जाने पर खगडिय़ा से अररिया तक फैले दारू नेटवर्क, गिरोह में शामिल चेहरे और संरक्षण देने वाले नेता बेनकाब हो जाते।

अब शहीद आशीष के कातिल को दबोचने के लिए लगातार कांबिंग ऑपरेशन दियारा में चलाए जाने से दिनेश संचालित दारू बेचवा गिरोह में शामिल सहयोगी पड़ोसी जिले में पलायन कर चुके हैं। खगडिय़ा जिले के परबत्ता प्रखंड के कोलवारा पंचायत स्थित तेहाय गांव से उसके सारे अपने भूमिगत हो गए हैं। रिश्तेदारों के जरिये पुलिस टीम दिनेश तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। इस बात की ज्यादा संभावना जताई जा रही है कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त दिनेश मुनि खुद को सुरक्षित ठिये में कैद कर लिया है।

इधर पुलिस लगातार उसे दबोचने को दबिश दे रही है। उसके पूर्णिया में छिपे होने की भनक पर पुलिस वहां भी दबिश दी। उसके सिलीगुड़ी और नेपाल में होने की चर्चा की पुलिस टीम सत्यता पता कर रही है। दरअसल पुलिस इसपर सतर्कता से काम कर रही है कि दिनेश को संरक्षण देने वाले नेता और उसके लगुए-भगुए ऐसी हवा भी फैलाने में हैं ताकि ऑपरेशन में लगी पुलिस टीम में दिनेश मुनि की उपस्थिति और उसके ठिकाने को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो जाए। ऐसी स्थिति से बचने के लिए पुलिस टीम दियारा को ही दबिश का केंद्र बिंदु बना रखी है।

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By न्यूज़ डेस्क

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