गणेश उस्तव गणेश चतुर्थी से शुरू हो रहा है। गणेशोत्सव भाद्रपद मास की चतुर्थी से चतुर्दर्शी तक यह उत्सव मनाया जाता है। 10 दिन का यह उत्सव अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होगा। एक तरफ जहां गणेश चतुर्थी पर बप्पा को घरों में विराजमान किया जाता है वहीं अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा का विसर्जन किया जाता है। इन 10 दिनों में बप्पा की सुबह शाम पूजा की जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि गणपति की पूजा के लिए कुछ बातों का पता होना चाहिए:

गणेश चतुर्थी पर गणेश भक्तों को आज चंद्रमा के दर्शन से बचना चाहिए नहीं तो वह परेशान हो सकते हैं। भाद्र पद शुक्ल चतुर्थी की रात को चन्द्रमा देखने वाला कलंक का भागी होता है।

नियत दिन पर आप गणपति को अपने घर में विराजमान करें। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बाईं ओर सूंढ वाली गणेशजी की प्रतिमा अधिक शुभ होती है। बाईं ओर सूंढ वाली गणेशजी की प्रतिमा को विरजमान करने से पहले कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। चार हल्दी की बिंदी लगाएं।

भगवान गणेश की पीठ के दर्शन कभी नहीं करने चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि उनकी पीठ पर दरिद्रता का वास है, जो भी पीठ के दर्शन करता है तो दरिद्रता का प्रभाव बढ़ जाता है।

गणेश जी को स्थापित कर रहे हैं तो उनके साथ गणेशजी की पत्नी रिद्धि और सिद्धि एवं पुत्र शुभ और लाभ की भी पूजा करनी चाहिए। यही नहीं मूषक भी पूजा करनी चाहिए।

गणेश जी को भूल से भी तुलसी नहीं अर्पित करनी चाहिए। पुराणों में गणेशजी के भोग में तुलसी का प्रयोग वर्जित बताया गया है। उन्हें दुर्वा अर्पित करनी चाहिए।

 

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By न्यूज़ डेस्क

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