12 करोड़ की लागत से बने रेलवे के टेकानी स्थित गुड्स शेड ने व्यापारियों की मुसीबत बढ़ा दी है। टेकानी भागलपुर शहर से करीब 15 किमी दूर है। तीन-चार साल की मेहनत के बाद वहां गुड्स शेड का शुभारंभ पिछले माह हुआ। चार दिन पहले सीमेंट लदा पहला रैक वहां पहुंचा। पहले रैक को लेकर रेल अधिकारियों में उत्सुकता रही, लेकिन अंदर-अंदर वे भी भयजदा हैं कि माल को वहां से ले जाने में जिस तरह की परेशानी व्यवसायी को उठानी पड़ रही है, यदि वे नवगछिया रैक की ओर रुख अख्तियार करते हैं तो गुड्स शेड पर खर्च करोड़ों बर्बाद हो जाएगा।
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माल अनलोड करने के लिए मजदूरों के संगठनों में तनातनी से रैक फंसने का खतरा
अनलोडिंग कॉस्ट 5 से बढ़कर 12 रुपये प्रति बैग हो गया
शहर से 15 किमी दूर रैक प्वाइंट होने की वजह से व्यापारियों को सामान का अनलोडिंग कॉस्ट ज्यादा लग रहा है। जहां पहले भागलपुर रैक प्वाइंट से माल उठाव में प्रति बैग पांच रुपये लग रहे थे, वहीं अभी 10-12 रुपये लग रहे हैं। दूसरी परेशानी माल अनलोड करने को लेकर मजदूरों के दो संगठनों में तनातनी है। भागलपुर रैक प्वाइंट पर काम करने वाले मजदूर टेकानी शिफ्टिंग को लेकर खुद के पेट पर लात पड़ जाने जैसा महसूस कर रहे हैं।

टेकानी का रेलवे का गुड्स शेड।
नवगछिया में मंगाने पर पहले जितना खर्च का अनुमान
टेकानी में अब बड़े व्यापारी नवगछिया से ही माल मंगाने का मूड बना रहे हैं। वहां ज्यादा परेशानी नहीं है। नवगछिया रूट पर रैक मंगाने में भागलपुर से कम रेल भाड़ा का खर्च आता है। व्यापारियों को लगता है कि यदि नवगछिया रैक पर ही माल अनलोड कराकर विक्रमशिला पुल के रास्ते भागलपुर मंगाया जाय तो कॉस्ट पहले जितना ही लगेगा। यदि व्यापारी कॉस्ट बचाने के लिए नवगछिया का सहारा लेते हैं तो करोड़ों रेलवे की डेड प्रोपर्टी बेकार हो जाएगी।

व्यापारियों को एक्सट्रा रिबेट दे रेलवे : चैंबर
ईस्टर्न बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार सर्राफ ने बताया कि टेकानी में मालगोदाम शिफ्टिंग के बाद माल मंगाने में व्यापारियों की लागत बढ़ गई है। जिसकी पूर्ति माल पर ज्यादा चार्ज करने से होगा। इसका असर आम लोगों पर पड़ेगा। बाजार भाव नियंत्रण में रखने के लिए व्यापारी दूसरे रैक प्वाइंट का सहारा लेंगे। हमारी मांग है कि व्यापारियों को रेलवे एक्सट्रा रिबेट दे।

