नवगछिया : बिहपुर थाना क्षेत्र के दुधैला गांव में लगभग 10 दिन पहले अपराधियों द्वारा किए गए दुस्साहसिक वारदात का जवाब अब तक पुलिस द्वारा नहीं दिया गया है. अभी भी जांबाज दरोगा शहीद आशीष कुमार सिंह के खूनी दिनेश मुनि और अशोक मंडल छुट्टा घूम रहे हैं. सुबह के 5 जिलों की पुलिस इन दोनों अपराधियों के पीछे है लेकिन पुलिस के पास उपलब्धि के रूप में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एक एफआईआर कॉपी, लाश का पंचनामा, विभिन्न स्टेशनों की डायरी में छापेमारी के अभिलेख के अलावा कुछ नहीं है. आम लोग सवाल उठाने लगे हैं कि जब आशीष जैसे तेज तर्रार पुलिस पदाधिकारी की हत्या के बाद भी अपराधी पकड़ में नहीं आ रहे हैं तो आम लोगों के साथ आगे क्या होगा.
मालूम हो कि दरोगा आशीष क्या हत्या की प्राथमिकी थाने में दर्ज की गई है और कांड के अनुसंधानक बिहपुर के सर्किल इंस्पेक्टर संजय कुमार सुधांशु को बनाया गया है. जानकारी मिली है की भागलपुर, नवगछिया, खगड़िया, मधेपुरा और मुंगेर जिले के सीमांत क्षेत्रों के विभिन्न थानों के पुलिसकर्मियों को दारोगा हत्याकांड के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी में लगाया गया है. पुलिस प्रक्षेत्र के आला अधिकारी इस मामले की खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं. दोनों आरोपियों के सगे संबंधियों को भी पुलिस ने खंगाल ना शुरू कर दिया. विभिन्न गांव में पुलिस ने पहुंचकर दोनों आरोपियों के सगे संबंधियों जानकारी ले रहे हैं.
इस मामले में एसआईटी का भी गठन कर दिया गया है और अलग-अलग टुकड़ों को विभिन्न क्षेत्रों में छापेमारी के लिए सक्रिय किया गया है. बिहपुर थाना अध्यक्ष सुचित कुमार भी दियारा इलाके में लगातार छापेमारी कर रहे हैं. रविवार को देर रात पुलिस पसराहा, सुल्तानगंज, नारायणपुर के गंगा कोसी क्षेत्रों में छापेमारी कर रही थी. बिहपुर के सर्किल इंस्पेक्टर और कांड के अनुसंधान अक संजय कुमार सुधांशु ने बताया कि अपराधियों की धरपकड़ के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है जल्द से जल्द पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार कर लेगी.

अपने गिरोह को सांगठनिक रूप दे चुका था दिनेश मुनि
मिथिलेश यादव की हत्या के बाद गंगा दियारा में जब शक्ति शून्यता हुई तो यहां दिनेश अपराध का एक नया नाम बनकर उभरा. उसने अपने गिरोह को काफी कम समय में सांगठनिक रूप दे दिया. बात सामने आई है कि नारायणपुर में रहने वाले कई सफेदपोश जनप्रतिनिधि के संरक्षण में वह गिरोह चलाता था. किसानों की जमीन पर अवैध कब्जा, बंदूक की नोक के बल पर गंगा में मछलियों की शिकारमही करना, और दोनों जरायम धंधे में जब मंदी आ जाए तो सड़क की ओर रुख कर लूट करना इस गिरोह का मुख्य पेशा था. बात सामने आ रही है कि विगत 2 वर्षों से दिनेश मुनि गंगा किनारे रोज 30 से 50 लोगों का खाना बनवाता था. यहां पर खाना खाने वाले लोग दिनेश मुनि गिरोह के सदस्य थे.

यह भी जानकारी सामने आई है कि दिनेश मुनि के कई शागिर्द गांव के लोग थे. गांव में कौन प्रवेश कर रहा है या फिर गांव की क्या गतिविधि है, कौन कहां क्या बोल रहा है यह सब दिनेश मुनि को मालूम रहता था. यही कारण था कि पसराहा पुलिस जब छापेमारी में पहुंची तो दिनेश मुनि को पहले से इसकी सूचना थी और वह पूरी तरह से अलर्ट था. जानकारी मिली है कि पसराहा थाना क्षेत्र के तिहाय निवासी कुख्यात दिनेश मुनि का पैतृक गांव मधेपुरा जिले के फुलौत थाना क्षेत्र के चिरौरी पंचायत के तिनमुंही गांव के रहने वाले हैं. जहां पिता दुकानदारी करते हैं तो दिनेश का मुखिया पति से बगावत चलता है. पंन्द्रह वर्ष पुर्व शादी होने के बाद ससुराल तिहाय में ही रहने लगा. लेकिन फुलौत दियारा के खोपड़िया बासा इसका मुख्य ठिकाना बताया जा रहा है. इस गिरोह को गंगा दियारा के आसपास रहने वाले लोग कुटुम गिरोह के नाम से भी जानते हैं.


