नवगछिया. जिले के नवगछिया में बैंक अफसरों की मिलीभगत से तीन बैंकों के 50 लाख और 11 व्यापारियों के 1.50 करोड़ रुपए डूब गए। नवगछिया में कपड़े का कारोबार करने वाला जितेंद्र कुमार उर्फ गौरव केनरा, यूनियन व इलाहाबाद बैंक और व्यापारियों को चूना लगाकर भाग गया।


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कारोबारी ने केनरा और यूनियन बैंक से 20 लाख की सीसी कराई। 10 लाख केनरा और 10 लाख रुपए यूनियन बैंक ने बिना एग्रीमेंट ही कैश क्रेडिट (सीसी) कर दी। यहीं नहीं इलाहाबाद बैंक ने घर बनाने के लिए 30 लाख रुपए लोन भी दे दिया। कारोबारी ने सिर्फ तीनों बैंकों को ही नहीं ठगा, बल्कि उसने 11 कारोबारियों को भी धोखे में रखा और व्यापार के नाम पर अपनी गुडविल का फायदा उठाकर 1.50 करोड़ रुपए बटोरे। महज दो माह में दो करोड़ बटोरकर व्यापारी चंपत हो गया।

मालिक की रजामंदी के बिना ही करवा ली सीसी
जितेंद्र ने यूनियन और केनरा बैंक से 10-10 लाख की दो सीसी करवा ली। उसने बड़ी ही चतुराई से बैंक अफसरों को मिलाया और शांति कॉम्पलेक्स के मालिक मोहित से दुकान का एग्रीमेंट करवाए बिना ही फर्जी दस्तावेज बैंक को दिए। अफसरों ने इसकी तस्दीक किए बिना ही उसे 20 लाख की सीसी जारी कर दी।

महज एक साल पुरानी दुकान के फर्जी टर्नओवर पर लिया लोन

इधर, बैंक से सीसी जारी हुई, उधर जितेंद्र ने अपनी खरीदी जमीन पर मकान बनाने के लिए इस बार तीसरे बैंक इलाहाबाद को निशाना बनाया। महज एक साल पुरानी दुकान का फर्जी टर्नओवर और आमदनी बताकर बैंक से 30 लाख का लोन ले लिया। इस बैंक के अफसरों ने भी उसकी आमदनी को नजरअंदाज कर लोन दे दिया।

व्यापारियों से एक कट्ठा जमीन पर उठाया पैसा
व्यवसायी जीतेंद्र नवगछिया के 11 व्यापारियों समेत एक आर्मी के जवान से 1.50 करोड़ रुपए व्यापार के लिए कर्ज लिया। व्यापारियों ने बताया, उसने कहा था कि पैसे न चुका पाने पर घर के लिए खरीदी एक कट्ठा जमीन लिख देंगे। किसी से 6 तो किसी से 14 व 36 लाख लिए। अपनी दुकान के कर्मचारी मिथिलेश को भी नहीं बख्शा, एक लाख इससे भी लिया।

मामला तब खुला, जब सभी व्यापारी अपने पैसे मांगने भगोड़े के घर पहुंचे
मामला तब खुला, जब सभी व्यापारी अपने पैसे मांगने भगोड़े जितेंद्र के घर पहुंचे। पूरा घर व दुकान खाली था और पूरा परिवार नदारद था। उसके भागने की सूचना के बाद भी बैंक के अफसरों ने चुप्पी साधे रखी। किसी ने भी मामले में एफआईआर तक करवाने की कोशिश नहीं की। ढोलबज्जा के अरुण जायसवाल के दो बेटे जितेंद्र कुमार उर्फ गौरव और सौरभ ने नवगछिया में डेरा डाला। दोनों अपने परिवार के साथ राजेंद्र कॉलोनी के एक मकान में किराए पर रह रहे थे।

जीवनयापन के लिए एक साल पहले जितेंद्र ने मोहित कुमार के शांति कॉम्पलेक्स में कपड़े की दुकान खोली और सौरभ ने मेन मार्केट में अपनी कपड़े की दुकान खोली। इस बीच नवगछिया हाईस्कूल के सामने एक कट्ठा जमीन भी खरीदा। बताया जाता है कि इन दुकानों को खोलते ही बैंकों को चूना लगाने की तैयारी भी शुरू कर दी थी।

ऐसे खुला मामला
पैसे बटोरते ही जितेंद्र, उसका भाई सौरभ पूरे परिवार के साथ दो माह पहले भाग खड़ा हुआ। बिना दुकान मालिक को बताए दुकान से सामान बटोर लिया। मकान खाली कर दिया। जब तय समय पर व्यापारी अपने पैसे की मांग के लिए उसके घर पहुंचे तो पता चला, वह नहीं था। दुकान का शटर तोड़ा तो दुकान खाली मिली। इसके बाद व्यापारी उसकी जमीन पर कब्जा करने पहुंचे तो इलाहाबाद बैंक पहले से ही यहां दावेदारी कर रहा था। इसके बाद पूरा मामला खुला।

सवाल?…- एक माह पहले तक कर्ज की किस्त चुकाई, इसके बाद दूसरी किस्त न मिलने और उसके भागने के बाद भी बैंकों ने एफआईआर क्यों नहीं दर्ज करवाई। पुलिस को सूचना तक नहीं दी गई…क्यों?…यह बड़ा सवाल है। एक ही दुकान पर दो बैंकों ने अलग-अलग सीसी कैसे कर दी?।

दुकान मालिक के एग्रीमेंट के बिना हुई सीसी पर बैंक संदेह के घेरे में है।

जमीन के दस्तावेज बैंक में गिरवी हैं

उसके जमीन के दस्तावेज बैंक में गिरवी हैं। इसी आधार पर उसे 30 लाख का होम लोन दिया। कार्रवाई के लिए इंतजार किया जा रहा है। दो माह में यदि पैसे नहीं मिले तो मकान और जमीन की बैंक नीलामी करेगा। आतिश कुमार, मैनेजर, इलाहाबाद बैंक

मैं यह नहीं बता सकता कैसे सीसी दिया गया
मैं यह नहीं बता सकता कि जितेंद्र को किस आधार पर 10 लाख की सीसी दी गई। आरबीआई की गाइडलाइन है। सुमन भारती, मैनेजर, यूनियन बैंक

By Rishav Mishra Krishna

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