नवगछिया अनुमंडल के बिहपुर में कोसी के किनारे गवारीडीह स्थित करीब 25 फीट ऊंचे टिल्हे पर गवारीडीह में मिले प्राचीन पुरातात्विक सामग्रियों को जिला प्रशासन संरक्षित करेगा। फिलहाल उस टिल्हे की खोदाई पर रोक लगाई दी गई है। एडीएम राजेश झा राजा ने बिहपुर के अंचल अधिकारी को फोन कर गवारीडीह खोदाई स्थल की पूरी जानकारी मांगी
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साथ ही नवगछिया डीसीएलआर से जमीन से संबंधित पूरी जानकारी देने को कहा है। एडीएम ने बताया कि अंचलाधिकारी और डीसीएलआर से पूरी जानकारी आ जाने के बाद पुरातत्व विभाग को लिखा जाएगा। फिलहाल वहां पर खोदाई पर रोक लगा दी गई है।

पुराविदों एवं इतिहासकारों की टीम रविवार को गवारीडीह स्थित करीब 25 फीट ऊंचे टिल्हे पर मिले प्राचीन पुरातात्विक सामग्रियों का अध्ययन किया था। गवारीडीह में पुरातात्विक अवशेषों के अध्ययन के बाद शोध टीम के सदस्यों का कहना है कि गवारीडीह में 1000 ईपू के मिले पुरातात्विक अवशेषों से यह स्पष्ट होता है कि यहां की नगरीय सभ्यता अंग की राजधानी चंपा से भी पुरानी है, जिसकी निरंतरता 12 वीं शताब्दी तक रही होगी।
महानगर के रूप में चंपा का अभ्युदय छठी शताब्दी ईपू में हुआ। अंग का महाजनपद के रूप में आकार लेना एक क्रमिक विकास की परिणति थी। अधिसंख्या में गवारीडीह में वैदिक काल के पात्रों का पाया जाना अरबन सैटलमेंट के पूर्व की स्थिति को इंगित करता है। छठी शताब्दी ईपू में जब लोहे के उपयोग के कारण अधिशेष उत्पादन के कारण नगरों का विकास प्रारंभ हुआ, जिससे चंपा के अभ्युदय की पृष्ठभूमि बनी।

