नवगछिया के जगतपुर झील पर परिवार के साथ घूमने की आस अधूरी रह गई। पर्यटन की दृष्टि से झील के साैंदर्यीकरण पर ग्रहण लग गया है। करीब छह माह पहले जिला प्रशासन की पहल पर झील के साैंदर्यीकरण की याेजना बनी। मनरेगा से तालाब का निर्माण हाेना था। किनारे में पेवर्स ब्लाॅक के साथ पाैधराेपण किए जाने थे। घूमने आने वाले लाेगाें के बैठने के लिए बेंच बनने थे, ताकि वहां प्रवासी पक्षियाें के कलरव काे लाेग निहार सके।

इस दिशा में मनरेगा की ओर से काम भी शुरू किया गया। लेकिन वन विभाग की राय में वहां प्रवासी पक्षी आते हैं, ऐसे में लाेगाें के आवागमन से समस्या हाे सकती है। इसलिए अब इस दिशा में वन विभाग काे ही पहल करने की जवाबदेही दी गई है। शुरुआती दाैर में मनरेगा से शुरू हुए काम बंद कर दिए गए हैं। जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए डीएफओ काे प्रस्ताव बनाकर वन विभाग काे भेजने के लिए कहा गया है।

लेकिन अब तक वन विभाग ने इस दिशा में काेई पहल नहीं की है। इससे जगतपुर झील के साैंदर्यीकरण का मामला पूरी तरह से अटक गया है। फिलहाल, इसके साैंदर्यीकरण की काेई याेजना नहीं है। बता दें कि अप्रैल के अंत में डीएम ने वहां का निरीक्षण किया था। इसके बाद ही जगतपुर झील काे पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की याेजना बनी थी।

मनरेगा से एक-एक एकड़ में चार तालाब बनाने की थी याेजना

बता दें कि करीब छह माह पहले डीएम ने वहां का निरीक्षण किया था। इसके बाद ही नवगछिया की जगतपुर झील के साैंदर्यीकरण की तैयारी शुरू की गई थी। याेजना थी कि वहां हरियाली के बीच बैठकर देशी-विदेशी पक्षियाें के कलरव काे लाेग निहार सकेंगे। मनरेगा के तहत 4.5 एकड़ में फैली जगतपुर झील से जलकुंभी हाेगी। साथ ही मनरेगा से ही एक-एक एकड़ के चार तालाब बनेंगे। वहां सीढ़ियां बनेंगी। किनारे पर पेवर्स ब्लाॅक लगेंगे। तालाब के किनारे पाैधे भी लगाए जाएंगे। सभी तालाबाें का साैंदर्यीकरण हाेगा। तालाब में वन विभाग वाेटिंग की भी व्यवस्था करेगा। लेकिन कुछ दिनाें के अंदर ही सारे काम ठप पड़ गए।

ठंड में प्रवासी पक्षियाें से गुलजार रहता है झील

जिले में नवगछिया के इलाके में जगतपुर झील का खास महत्व है। यह देशी-विदेशी पक्षियाें से गुलजार रहती है। खासकर ठंडे के माैसम में यहां पक्षियाें का कलरव देखने काे मिलता है। भाेजन की तलाश में और जल क्रीड़ा करते हुए पक्षियां यहां नजर आते हैं। कुछ माह पहले पक्षी प्रेमियाें की एक टीम ने इस इलाके का सर्वे किया था। इसमें पाया गया था कि वहां पक्षियों की विविधता में काफी बढ़ाेतरी हुई है। कुछ पक्षी इस झील में लंबे अरसे बाद दिखे थे। खासकर शिल्ही, इनकी संख्या यहां करीब 200-250 है।

डीएफओ काे प्रस्ताव बनाने काे कहा है

शुरुआती दाैर में जगतपुर झील के साैंदर्यीकरण की दिशा में पहल की जा रही थी। लेकिन वहां काफी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं, ऐसे में वन विभाग के अफसर की राय थी कि इससे समस्या आ सकती है। इसलिए डीएफओं काे पर्यटन व इकाेलाॅजी काे ध्यान में रखकर प्रस्ताव बनाकर वन विभाग काे भेजने के लिए कहा गया है।
– सुब्रत सेन, डीएम।

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By न्यूज़ डेस्क

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