राज्य सरकार का सचिवालय (सिंचाई भवन) नीलाम होगा. पटना के सब जज एक की अदालत ने जल संसाधन विभाग द्वारा संवेदक को सात साल बाद भी करीब पांच करोड़ रुपये का भुगतान नहीं करने पर सिंचाई भवन को अटैच करने का आदेश दिया है.

इससे संबंधित नोटिस मंगलवार को भवन के प्रथम तल पर स्थित प्रधान सचिव कार्यालय के बाहर चिपका दिया गया. हालांकि, इस संबंध में जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव त्रिपुरारी शरण ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है. इस संबंध में जानकारी लेकर आगे उचित कार्रवाई की जायेगी.

मामला बकाया राशि भुगतान नहीं होने का : इससे संबंधित केस मेसर्स केम्स सर्विस प्रा लि, मौर्यालोक के निदेशक मोहन कुमार खंडेलवाल ने दाखिल किया था.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में उन्होंने नवगछिया के कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के यहां करीब 4.95 करोड़ रुपये का काम किया. लेकिन, दो साल बाद भी भुगतान नहीं होने पर उन्होंने वर्ष 2013 में जल संसाधन विभाग पर बकाया वसूली के लिए बिहार पब्लिक वर्क्स ओर्बिटेशन ट्रिब्यूनल में केस दाखिल किया. इसमें कंपनी को बिहार सरकार के विरुद्ध भुगतान की डिग्री मिल गयी.


हाईकोर्ट की डिग्री के बाद भी नहीं दी राशि : डिग्री राशि से असंतुष्ट मोहन खंडेलवाल ने हाईकोर्ट में सिविल केस (24/2015) दाखिल किया. उनके मुताबिक इस केस पर 21 अगस्त 2017 को फैसला आया, जिसमें आदेश के एक महीने के अंदर राशि भुगतान करने को कहा गया.

हाईकोर्ट के आदेश पर भी बिहार सरकार द्वारा भुगतान नहीं करने पर केम्स सर्विस ने सब जज एक पटना की अदालत में इजरायल वाद 61/2015 दायर किया. इसमें 24 अगस्त 2018 को न्यायालय ने अब तक भुगतान नहीं होने पर जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव (सिंचाई भवन) की चल एवं अचल संपत्ति को अटैच करने का आदेश जारी किया. इस केस में अगली कार्रवाई के लिए 15 सितंबर 2018 की तारीख निर्धारित की गयी है.

ब्याज के साथ बिहार सरकार देगी राशि : केम्स सर्विस के निदेशक मोहन खंडेलवाल ने बताया कि बिहार सरकार को बकाया राशि का भुगतान ब्याज के साथ करना होगा. ऑर्बिटेशन ट्रिब्यूनल कोर्ट और हाईकोर्ट ने इससे संबंधित निर्देश देते हुए कहा है कि मूल राशि के साथ ही सालाना दस प्रतिशत ब्याज भी देना होगा. ब्याज की गणना वर्ष 2011 से ही की जायेगी.

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By न्यूज़ डेस्क

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