खरीक : जब कटाव शुरू होलै डर से बाप बेटी जान बचाय के भागलो जाय रिहै, अचानक दोनों तरफ से धसना गिरलै हम दोनों चल गेलियै कोसी माया के तल में” यह कहना है शहर में हुई कोची कटाव के धसान में नदी में डूबी महिला रिंकू के वृद्ध पिता रतन मंडल का है. गंभीर रूप से जख्मी रतन मंडल बताते हैं कि बीते 30 साल से कोसी नदी के तट पर घर बनाकर रह रहा हूं लेकिन ऐसा कटा अब तक जीवन में नहीं देखा था. मुझे पता नहीं था कि मेरा घर पूरे परिवार के साथ ध्वस्त होकर खुशी में समा जाएगा. ऐसा थोड़ा सा भी भनक लग जाता तो हम लोग घर खाली कर देते.

बांध के पश्चिमी छोड़ के तरफ कटाव शुरू नहीं हुआ था.हम लोग अपने अपने घरों को सुरक्षित समझ रहे थे.अचानक बुधवार को कोसी नदी का तेज बहाव और प्रलयकारी कटाव मेरे पूरे परिवार को अपने आगोश में समा लिया अचानक मेरे घर की जमीन समेत घर नीचे की ओर धसने लगी. जब तक मैं कुछ समझ पाता तब तक मेरे भांजे पप्पू मंडल ने हाथ बढ़ाकर आवाज लगाई भागो घर धसने लगा.यह सुनते ही उसकी बुरी पत्नी मीना देवी,नाती पप्पू की पत्नी खुशबू देवी और उसके तीन बच्चे रोशन,लव कृष्णा ईटख-परैल के घर से निकलकर भागने लगी. उसके पीछे छोटा नाती फुदो और और बेटी भी थी.

जब तक जमीन और घर धस कर स्थल से नीचे जाती तब तक वे सभी लोग कूदकर जमीन तक पहुंच चुके थे और उन लोगों की जान भी बच गई थी. मेरा नाती पप्पू अन्य लोगों को निकालने के क्रम में वह भी मेरे साथ फंस गया. अचानक मेरा घर जमीन समेत 40 फीट से अधिक गहरे कोसी नदी की गहराई में समाने लगा मैं और मेरी बेटी रिंकू देवी जान बचाने के लिए भागा लेकिन अचानक दोनों तरफ हो रहे भीषण कटाव से मिट्टी की बड़ी चट्टाने मेरे और मेरी बेटी की ओर आ गिरा. इसके बाद मुझे कुछ भी पता नहीं अचानक मुझे अंदर कुछ झटका लगा और मैं पानी में ऊपर आ गया तैरने की कोशिश किया किसी तरह तैर कर बाहर बाहर निकलने की कोशिश करने लगा उसी बीच मिट्टी की चट्टानें भी गिर रही थी तब तक कुछ ग्रामीणों ने बांस का सहारा देकर बताओ की दिशा से विपरीत दूसरे दिशा की ओर बांस का सहारा देकर लोगों ने मुझे निकाला.

लेकिन मेरी बेटी की मौत हो गयी. बड़ी प्यार से पाला था मेरा सब कुछ उजड़ गया नाती तैर कर बाहर आ गया पप्पू मंडल का कहना है की मां ने मेरी तरफ हाथ बढ़ाया था मैंने हाथ ही दिया सहारा के रूप में लेकिन कटाव की चट्टानों के नीचे दबी मां का हाथ छूट गया और मां कोसी में समा गई मलाल है कि मैं अपनी मां को बचा नहीं पायी यह कह कर मृतका का पुत्र पप्पू मंडल और पिता रतन मंडल फफक कर रोने लगता है. मृतका की मां गश खाकर गिर जाती थी अचानक उसकी दूसरी बेटियों से सहारा देकर उठाती थी पूरे परिवार की चित्कार से पूरा कटाव स्थल गमगीन हो गया था. परिवार कीलोगों को समझ में नहीं आ रहा था की क्या करें.

मृतका अपने पीछे पुत्र पप्पू मंडल पतोहू खुशबू देवी पोती रोशन पौत्र लव कृष्णा वृद्ध पिता रतन मंडल मां मीना देवी और बहन पीछे छोड़ गई है. परिवार की माली हालत बहुत ही खराब है. बड़ी मुश्किल से लोगों ने घर बनाया था सभी लोगों का घर उजड़ गया लोग खुले आसमान के नीचे जीवन जीने को विवश है. प्रशासन के लोगों ने भरोसा दिलाया है कि जो भी हो सकेगा मदद किया जाएगा.

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By Rishav Mishra Krishna

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