ढोलबज्जा। नवगछिया अनुमंडल के खैरपुर कदवा पंचायत के गोला टोला कदवा में स्थित मां काली मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में भी विख्यात है। लगभग ढाई सौ वर्ष पूर्व पकरा निवासी रघु प्रसाद सिंह ने अपनी निजी जमीन पर इस मंदिर की स्थापना की थी। तभी से यहां मां काली की पूजा-अर्चना, भक्ति और आस्था का सिलसिला निरंतर चला आ रहा है।
मंदिर के वर्तमान पुजारी अमीर राम ने बताया कि प्रत्येक वर्ष कार्तिक अमावस्या, यानी दीपावली की रात, मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। इस दौरान मां काली की प्रतिमा और कलश स्थापना की जाती है, और पूजा पंडित विधान चौधरी द्वारा वेदोच्चारण और सात्विक विधि से संपन्न कराई जाती है।
पुजारी के अनुसार, जो भी भक्त सच्चे मन से मां काली के दरबार में मनोकामना मांगता है, देवी उसकी हर इच्छा पूरी करती हैं। यही कारण है कि दीपावली की रात मंदिर परिसर में सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। श्रद्धालु दीपक जलाकर, नारियल चढ़ाकर और घंटियों की गूंज के बीच माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

शाम होते ही मंदिर परिसर और आसपास का इलाका सैकड़ों दीपों की रोशनी से जगमगा उठता है। आरती के दौरान वातावरण में घंटा-घड़ियाल, शंखध्वनि और ‘जय काली मां’ के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठता है। दीपावली की इस पावन रात को यहां का दृश्य अत्यंत अलौकिक और भक्तिभाव से ओतप्रोत होता है।
मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दो दिवसीय भव्य मेले का आयोजन किया जा रहा है। मेला क्षेत्र में हस्तशिल्प, खिलौने, पूजा सामग्री, मिठाइयाँ, झूले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की दुकानें सजाई जाती हैं। मेले में स्थानीय कलाकारों के भक्ति गीत, झांकी प्रदर्शन और लोकनृत्य कार्यक्रम श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं।
मेला सचिव गुरुदेव सिंह और अध्यक्ष मणिकांत सिंह ने बताया कि मंदिर का निर्माण पूरी तरह स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग और श्रद्धा से किया गया है। उन्होंने बताया कि पहले इस मंदिर में बलि प्रथा प्रचलित थी, जिसे लगभग 70 वर्ष पूर्व समाप्त कर दिया गया। तब से यहां केवल सात्विक पूजा-पद्धति से ही आराधना की जाती है।
उन्होंने आगे कहा कि मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण को लेकर व्यापक तैयारी की गई है। कदवा पुलिस चौकी के पुलिस बल के साथ-साथ दर्जनों होमगार्ड और स्वयंसेवक भी तैनात रहेंगे। साथ ही सीसीटीवी कैमरों और बैरिकेडिंग की व्यवस्था भी की जा रही है ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मां काली का यह मंदिर पूरे क्षेत्र की आस्था, एकता और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है। दीपावली की रात यहां आने वाले भक्तों का विश्वास और उमंग देख यह कहा जा सकता है कि भक्ति और परंपरा आज भी गांव के जीवन में गहराई से रची-बसी है।
मंदिर समिति के सदस्यों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे साफ-सफाई और शांति व्यवस्था बनाए रखें, ताकि इस वर्ष का पर्व सौहार्दपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न हो सके।

