धनतेरस को लेकर लोगों में उत्साह चरम पर है। बाज़ारों में सोना-चांदी, बर्तन और सजावटी सामान की खरीदारी को लेकर भीड़ देखी जा रही है।

पंडित दयानंद पाण्डेय के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस कहा जाता है। इस वर्ष धनतेरस 18 नवंबर (शनिवार) को मनाई जाएगी। इस दिन पंचधातु — सोना, चांदी, तांबा, पीतल और लोहा से निर्मित वस्तु खरीदना शुभ माना गया है, जिसमें सबसे अधिक शुभ चांदी की खरीदारी को बताया गया है।


धार्मिक महत्व और पूजन विधि

धनतेरस का संबंध यमराज से माना जाता है। इस दिन संध्या समय घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाना चाहिए। दीपक को एक पत्तल में अन्न रखकर यमराज के निमित्त समर्पित किया जाता है।

पूजन के दौरान इस मंत्र का जाप करना शुभ फलदायी माना गया है —

“मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यज: प्रीयताम् इति॥”

पंडित झा बताते हैं कि यमुना जी यमराज की बहन हैं, इसलिए इस दिन यमुना स्नान का भी विशेष महत्व बताया गया है।


धनतेरस के शुभ मुहूर्त

  • प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 7:16 से 8:20 बजे तक

  • अभिजीत मुहूर्त: दिन 11:40 से 12:20 बजे तक

इन दोनों मुहूर्तों में धनतेरस की खरीदारी व दीपदान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
पंडित झा ने बताया कि जो लोग पूरे दिन व्रत रखकर पूजन करते हैं, उन्हें धन, आरोग्य और सौभाग्य का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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By न्यूज़ डेस्क

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