नवगछिया में रेलवे की जमीन पर एक बार फिर अतिक्रमण की तैयारी शुरू हो गई है। जनवरी माह में रेलवे प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई किए जाने के बावजूद स्थिति में कोई स्थायी सुधार नहीं हो पाया है।
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उल्लेखनीय है कि 6 जनवरी को रेलवे प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। इस दौरान करीब 100 अतिक्रमित दुकानों को खाली कराया जाना था, लेकिन शाम हो जाने के कारण मात्र 50 से 60 दुकानों को ही हटाया जा सका और कार्रवाई रोक दी गई। इसके बाद से अब तक दोबारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप स्थानीय लोग लगा रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करीब 250 से अधिक दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे 10 से 12 फीट तक रेलवे की भूमि पर पुनः कब्जा कर लिया है। इससे स्टेशन क्षेत्र में अव्यवस्था और सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़ गए हैं।

जानकारी के अनुसार, रेलवे द्वारा केवल 30 दुकानों का ही टेंडर किया गया है। यह टेंडर मिल टोला सोनाडेरी से मिल टोला हनुमान मंदिर तक के क्षेत्र में तीन वर्षों के लिए दिया गया है। इन दुकानों का निर्धारित आकार 10×30 फीट तय है। आरोप है कि टेंडर शर्तों के अनुरूप निर्धारित स्थान पर कार्य न होकर अन्य स्थानों पर कच्ची एवं पक्की दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि अतिक्रमण स्थल से मात्र 50 मीटर की दूरी पर आरपीएफ थाना मौजूद है, इसके बावजूद अतिक्रमण धड़ल्ले से जारी है। जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर अब तक तीन से चार बार विजिलेंस टीम द्वारा जांच की जा चुकी है। बताया जा रहा है कि एक पदाधिकारी भी जांच के दायरे में आ चुके हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विजिलेंस टीम के आगमन से पहले स्टेशन क्षेत्र को अस्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त दिखा दिया जाता है, लेकिन टीम के जाते ही स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
इस संबंध में सहायक मंडल अभियंता (एडीईएन) बिहपुर ने बताया कि रेलवे की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई है, जबकि इसके बाद देखरेख की जिम्मेदारी आरपीएफ की है।
लगातार हो रहे अतिक्रमण से आमजन में भारी असंतोष है। लोगों ने रेलवे प्रशासन से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
