नवगछिया। सैदपुर दुर्गा मन्दिर में भागलपुर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आयोजित पांच दिवसीय श्री हरि कथा के अंतिम दिन साध्वी अमृता भारती ने कहा कि हरि नाम को रटने वाले तू हरि को जान ले। पूर्ण गुरु की कृपा से श्रीहरि का दर्शन आज भी प्राप्त होता है। आप खोज करें ऐसे पूर्ण गुरु संत की जो दर्शन करा दें। संत सहजोबाई जी ने जब दर्शन किया तो गा उठी हरि तजू पर गुरु ना विसारू, उन्होंने भी संत चरणदास जी की कृपा से जब देखा तब ऐसे भाव निकले ऐसे ही एक और इतिहास में ज्वलंत उदाहरण है।
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संत सूरदास जी जो कि जन्म से ही नेत्रहीन थे। लेकिन जन्मांध होने के बाद भी भगवान श्री कृष्ण के बाल लीला का कितना सुंदर से वर्णन किया। क्योंकि उनके जीवन में संत वल्लभाचार्य जैसे पूर्ण गुरु का आगमन था। आज हमें भी ऐसे गुरु की आवश्यकता है, लेकिन आज समाज में रहने वाले लोगों के समक्ष एक प्रश्न है कि ऐसा पूर्ण गुरु हमें कहां मिलेगा ? क्योंकि समाज में आज के परिवेश में देखे तो गुरुओं की दशा बड़ी दयनीय है समाज के नामी-गामी धर्मगुरु ही चरित्र हीनता एवं अनैतिकता के ज्वलंत उदाहरण बने दिखते हैं।
यदि आज हमारी श्रद्धा ठगी जा रही है तो इसके जिम्मेवार कहीं ना कहीं हम स्वयं भी हैं। आज सिर्फ अशिक्षित वर्ग ही नहीं शिक्षित वर्ग भी बिना सोचे समझे किसी को भी अपना गुरु बना लेते हैं और ऐसे गुरुओं के द्वारा जब हमारी भावनाओं के साथ खिलवाड़ होता है तो हम सभी गुरुओं पर उंगली उठा देते हैं । इस कार्यक्रम में मंच पर उपस्थित साध्वी पुष्पा भारती, शीतली भारती, लक्ष्मी भारती, गोपाल जी, चंदन कुमार,एवं प्रवेश जी सभी सहयोगी उपस्थित थे ।

