नवरात्र में मां की पूजा के साथ-साथ पूरे जिले में भक्ति का माहौल है। शनिवार को मंदिरों व पांडालों में पट खुलने के बाद मां का दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। नवगछिया के पुरानी दुर्गा मंदिर में निशा पूजा के बाद देवी का पट खुल गया। इसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का ताता देवी के दर्शन के लिए लग गया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एहतियातन पूजा समिति ने इंतजाम किया है। उधर, रेलवे स्टेशन पर दुर्गा मंदिर में भी देर रात निशा पूजन के बाद देवी का पट खुल गया। यहां पर पूजा कमेटी द्वारा नवरात्रि के अवसर पर कई तरह के आयोजन किए जा रहे हैं। उधर, तेतरी दुर्गा स्थान में भी वैदिक विधि विधान के साथ निशा पूजा की गई। खुलने के बाद तो मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।


ढोलबज्जा मंदिर में वैदिक विधि से होती है पूजा
नवगछिया प्रखंड के कोसी पार ढोलबज्जा में मां भगवती मंदिर काफी शक्तिशाली है। मंदिर की स्थापना सन 1955 में सुखदेव भगत व जगदीश भगत ने किया था। सर्वप्रथम इस मंदिर में सन 1921 में कलश स्थापना कर पूजा की शुरुआत स्थानीय ग्रामीण मोहन मंडल ने की थी। यहां वैदिक विधि विधान से माता की पूजा अर्चना की जाती है। सप्तमी के दिन विशेष पूजा होती है। यह मंदिर बिहार के तीन जिले भागलपुर, पूर्णिया व मधेपुरा की सीमा पर अवस्थित है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा करने आते हैं। मंदिर में बनारस के पंडित अजय पाठक विधि विधान से पूजा कराते है। आचार्य के रुप में योगेंद्र प्रसाद भगत, सह आचार्य राजकिशोर भगत, बीरेंद्र भगत, मौसम कुमार व सेवक बासुदेव मंडल, संतोष मंडल, सीताराम मंडल, जयचंद यादव, उमा शर्मा, साहेब मंडल अन्य ग्रामीण हैं। मान्यता है कि मैया के दरबार में सच्चे मन से जो भी भक्त मुरादें मांगते हैं उनकी मुराद अवश्य पूरी होती है।

7 किमी. दंड देते हुए नवगछिया दुर्गा स्थान पहुंची देवकी
नवगछिया : इस्माइलपुर लक्ष्मीपुर निवासी महिला देवकी देवी लक्ष्मीपुर से नवगछिया बाजार तक करीब सात किलोमीटर तक दंड देते हुए पुरानी दुर्गा स्थान पहुंची। देवकी देवी के नवगछिया पहुंचते ही उनके दर्शन के लिये श्रद्धालुओं का तांता लग लगा। साथ चल रहे भक्तों ने बताया कि लक्ष्मीपुर से देवकी डेढ़ बजे दंड की शुरूआत की थी और वह साढ़े सात बजे तक नवगछिया के पुरानी दुर्गा स्थान पहुंची, माता की पूजा की और भक्तों के बीच प्रसाद का भी वितरण किया।
45 वर्षीय देवकी ने बताया कि वह प्रति वर्ष सावन सोमवारी में बासुकीनाथ जाती है। इस बार उन्होंने देवी दुर्गा के दरबार मंे हाजरी लगाने की सोची और माता की कृपा से यह सच हो गया। देवकी ने कहा है माता सेे बच्चों को हठ करने का अधिकार है। आगे इससे भी बड़ा हठ योग कररुंगी। कहा कि वे माता से अपने लिये कुछ नहीं मांगती हैं। इलाके में सुख शांति हो वे माता से यही कामना करती हैं। पंडित अजीत कुमार पांडेय ने देवकी के हठयोग की सराहना की।

