नवगछिया के अर्जुन कॉलेज ऑफ नर्सिंग परिसर में आर्ट ऑफ लिविंग का ध्यान योग शिविर चल रहा है। रविवार को स्वामी परमतेज जी महाराज ने भस्त्रिका व ऊज्जायी सांसों की प्रक्रिया का अभ्यास कराया। उन्होंने कहा कि योग के अधिकांश आसन जानवर की बनावट से संबंधित हैं। इनमें सिंहासन, भुजंगासन, मत्स्यासन, शलभासन, उष्ट्रासन, गरुड़ासन, मकरासन और मयूरासन आदि प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा कि मनुष्य मोह-माया, क्रोध, उद्दंडता, काम वासना, ईर्ष्या और लोभ आदि से जकड़ा होता है। सुदर्शन क्रिया के अभ्यास से इन कुविचारों से मुक्ति पाई जा सकती है। इस क्रिया के माध्यम से शरीर की सभी कोशिकाएं जागृत व सक्रिय हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि भस्त्रिका सहानुभूति तंत्रिका तंत्र की क्षमता बढ़ाती है। सुदर्शन क्रिया के नियमित अभ्यास से मन की शांति, दृष्टि की सफाई और हृदय की गति धीमी होती है।
यह ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में चैनेलाइज करने का साथ-साथ स्वास्थ्य एवं खुशहाली में सुधार लाती है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कोलेस्ट्रोल कम होता है। सबसे महत्वपूर्ण है कि इस क्रिया से आत्मविश्वास की वृद्धि होती है और अवसाद के मुक्ति मिलती है। महाविद्यालय की अध्यक्ष नीलम देवी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। शिविर में भागलपुर व नवगछिया के प्रशासनिक व पुलिस पदाधिकारी, मुखिया, जनप्रतिनिधि, अर्जुन कॉलेज के प्राध्यापक और गैर शिक्षक शैक्षणिक पदाधिकारी तथा छात्र-छात्राएं आदि शामिल हुए।


