पटना विश्वविद्यालय की केंद्रीय लाइब्रेरी में उपराष्ट्रपति लैला-मंजनू का दीदार करेंगे। यहां लैला मंजनू की मूल पुस्तक रखी है। इसको मौलाना अब्दुल रहमान गनी ने 1740 ई. में लिखा था। मो. गनी साहब ने कुल सात पुस्तकें लिखी थीं। इसमें पटना विश्वविद्यालय के पास एक प्रति मौजूद है। यह पुस्तक पर्सियन भाषा में लिखी हुई है। पर्सियन की पुस्तकों में भाषा और तस्वीर का काफी महत्व होता है। लैला-मंजनू में भी काफी तस्वीरें हैं।
सेंट्रल लाइब्रेरी में उपराष्ट्रपति 10-15 मिनट ही रहेंगे। इसमें पांच से सात मिनट का समय पांडुलिपियों को दिखाने के लिए रखा गया है। लाइब्रेरी में मौजूद मिथिला अक्षर की पांडुलिपियों को दिखाने और इसके बारे में बताने के लिए मैथिली विभाग के सुधीर झा रहेंगे। वहीं अरबिक और पर्सियन की पांडुलिपियों के बारे में खुदाबख्श लाइब्रेरी के मो. अफरोज बताएंगे। वहीं संस्कृत की पांडुलिपियों के बारे में संस्कृत के शिक्षक जानकारी देंगे। इसके अलावा उपराष्ट्रपति को लाइब्रेरी की खासियतों से अवगत कराया जाएगा। उपराष्ट्रपति केंद्रीय लाइब्रेरी के म्यूजियम में थोड़ी देर भ्रमण करेंगे। वे पुरानी पांडुलियां भी देखेंगे। इसके बाद सीधे सायंस कॉलेज चले जाएंगे। यहां पर 12 बजे से 1 बजे तक कार्यक्रम में रहेंगे।


गेस्ट हाउस से गंगा का नजारा देखेंगे उपराष्ट्रपति
पटना विश्वविद्यालय के सेंट्रल लाइब्रेरी का शताब्दी समारोह रविवार को होगा। उपराष्ट्रपति के स्वागत के लिए विश्वविद्यालय का हर कोना तैयार हो गया है। सबसे बेहतर नजारा उपराष्ट्रपति को गेस्ट हॉउस से देखने को मिलेगा। गंगा के तट पर अवस्थित गेस्ट हाऊस से गंगा अविरल धारा को उपराष्ट्रपति देखेंगे।

