बिहार के बक्सर जिले के सीमा क्षेत्र में ब्रह्मपुर धाम से चर्चित बाबा ब्रह्मेश्वरनाथ मंदिर देश के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है. जिला मुख्यालय से करीब 35 किलो मीटर की दुरी पर यह मंदिर स्थित है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक ब्रह्माजी द्वारा स्थापित अति प्राचीन शिवलिंग को बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ के नाम से जाना जाता है. सावन महीने में यहां बड़ा मेला लगता है.
इस चर्चित स्थल को भगवान शंकर के प्रधान तीर्थों में माना जाता है. इसका वर्णन अनेक पुराणों में मिलता है. यह वही प्राचीन मंदिर है, जहां मुस्लिम आक्रांता मोहम्मद गजनी ने ब्रह्मेश्वरनाथ का चमत्कार देखा था. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. मान्यता है कि यहां शिवलिंग की स्थापना स्वयं ब्रह्माजी ने की थी. इसी वजह से इस इलाके का नाम भी ब्रह्मपुर है.

बताया जाता है कि मुस्लिम अक्रांता मोहम्मद गजनी ने किसी समय इस मंदिर पर हमला बोल दिया था. तब यहां के लोगों ने गजनी से अनुरोध किया कि इस शिव मंदिर को नहीं तोड़े. इस पर गजनी ने कहा कि ऐसा कोई भगवान नहीं है. उसने चुनौती दी थी कि अगर कोई भगवान है तो मंदिर का जो प्रवेश द्वार पुरब दिशा में है वह रात भर में पश्चिम की ओर हो जाए. उसने कहा कि ऐसा हुआ तो वह मंदिर को छोड़ देगा और कभी इसके पास नहीं आएगा.

अगले दिन जब गजनी मंदिर का विनाश करने आया तो दंग रह गया. उसने देखा कि मंदिर का प्रवेश द्वार पश्चिम की तरफ हो गया है. इसके बाद वह बाबा ब्रह्मेश्वरनाथ के चमत्कार से भयभीत होकर मंदिर को क्षति पहुंचाए बगैर वहां से लौट गया.
पंडित मुक्तेश्वर आचार्य और पंडा मनोज कुमार ने मंदिर के महत्व के बारे में कहा कि शिव महापुराण की रुद्र संहिता में ब्रह्मपुर में स्थित महादेव धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाले हैं. इन्हें मनोकामना महादेव भी कहा जाता है. इस मंदिर का मुख्य दरवाजा पश्चिम मुखी है, जबकि देश के अन्य शिव मंदिरों का दरवाजा पूरब दिशा में है.


