थाने के स्तर पर रोजाना एक वांछित आरोपी या अपराधी की गिरफ्तारी नहीं हुई तो संबंधित लचर या लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई होगी। इसको लेकर सोमवार को एडीजी (मुख्यालय) संजीव कुमार सिंघल ने सभी जिलों के एसएसपी व एसपी (रेल पुलिस समेत) को विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं।
इसके तहत प्राथमिकता के आधार पर संगीन मामलों (हत्या, अपहरण, लूट, डकैती, अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार अधिनियम, महिलाओं के खिलाफ अपराध आदि) में वांछित कम से कम एक अपराधी की गिरफ्तारी सुनिश्चित कराने के लिए अधीनस्थ अफसरों को जिम्मेवारी देने को कहा गया है। इसमें कोताही या शिथिलता बरतने वाले अफसरों को चिह्नित करके कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इसका रिपोर्ट मुख्यालय को भेजना होगा।

इससे पूर्व बीते मार्च में डीजीपी केएस द्विवेदी ने पदभार संभालने के बाद राज्य के सभी थानेदारों को टास्क देते हुए थाना स्तर पर रोजाना एक वांछित आरोपी की गिरफ्तारी के आदेश दिए थे। हालांकि विभिन्न जिलों से मिले रिपोर्ट की समीक्षा के दौरान लंबित मामलों में हुई गिरफ्तारी को पुलिस मुख्यालय ने संतोषजनक नहीं माना है। बहरहाल मुख्यालय द्वारा जारी ताजा निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि बार-बार याद दिलाने के बाद भी संगीन अपराध में वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने के कारण उसका प्रतिकूल असर अपराध व विधि-व्यवस्था पर भी पड़ता है।

10 महीने में 14 हजार 452 अपराधी गिरफ्तार
राज्य के विभिन्न जिलों में बीते 10 महीने में संगीन मामलों से जुड़े 14 हजार 452 अपराधियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है। इस दौरान कुल 1 लाख 74 हजार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। यानी हर माह आैसतन 17 हजार से अधिक आरोपी या अपराधी पकड़े जा रहे हैं।


