भागलपुर : अब निजी व्यावसायिक वाहनों के सामने वाले मिरर पर चालक का नाम और मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से लिखना होगा। यह जानकारी आसानी से दिखाई देने वाली होनी चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में या जांच के दौरान इसे तुरंत पढ़ा जा सके। इससे दुर्घटना या अपराध होने की स्थिति में पुलिस और संबंधित अधिकारियों को तुरंत चालक तक पहुंचने में मदद मिलेगी। खासकर स्कूली गाड़ियों के बस में परमिट, ड्राइवर का नाम मोबाइल नंबर लिखना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नियम से दुर्घटनाओं और आपराधिक मामलों में शामिल चालकों की पहचान करना और उन तक तुरंत पहुंचना आसान हो जाएगा।

दरअसल, अक्सर यह देखा जा रहा है कि दुर्घटना या किसी अपराध की घटना होने के बाद चालक मौके से फरार हो जाते हैं। जिससे उनकी पहचान करना और उन तक पहुंचना स्थानीय थाना की पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती है। कई मामलों में तो गाड़ी की भी सही पहचान नहीं हो पाती है। जिससे जांच प्रक्रिया में देरी होती है और दोषियों को पकड़ना मुश्किल हो जाता है। इस नई पहल के माध्यम से इस समस्या का समाधान तुरंत हो सकेगा। इस तरह का आदेश परिवहन विभाग से मिलने के बाद सड़कों पर प्रतिदिन जांच पड़ताल भी शुरू कर दी गई है।

जिन गाड़ियों में इस तरह के प्राथमिक स्तर की जानकारी नहीं लिखी रहती है। उनके खिलाफ आदेश का अवहेलना के तहत जुर्माना किया जा रहा है। 30 दिनों के अंदर भागलपुर परिवहन विभाग की टीम ने इस तरह के मामले में 66 गाड़ियों से जुर्माना वसूला है। 10 फीसदी गाड़ियों का है रजिस्ट्रेशन रद्द 10 प्रतिशत निजी व्यावसायिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन लंबे समय से रद्द है। ऐसे वाहन मालिक को चिह्नित कर परिवहन विभाग से नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ताज्जुब इस बात का है कि लंबे समय से गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन भले ही रद्द है, लेकिन इस तरह की गाड़ियां धड़ल्ले से सड़कों पर चल रही हैं।

ऐसे वाहनों पर कोई नियंत्रण नहीं होने के कारण राजस्व की हानि होती है। किसी भी तरह की दुर्घटना होने पर इसके तह तक पहुंचना मुश्किल होता है। जिन गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन रद्द रहता है। उनसे अवैध काम किए जा रहे हैं। इससे निपटना पुलिस के लिए भी मुश्किल हो रहा है। नए नियम से पुलिस को आसान और जनता को मिलेगा सीधा लाभ नए नियम के लागू होने के बाद अब पुलिस को किसी भी तरह की सड़क दुर्घटना होने पर अनुसंधान करने में विशेष परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा आंशिक मामले में आम लोगों को भी गाड़ी के ऑनर समेत अन्य जानकारी आसानी से मिल जाएगी। दरअसल सभी मामले में पुलिस तक जाना लोग मुनासिब नहीं समझते हैं। जिससे ऐसे मामलों को निपटने में आसानी होगी। कोट अब निजी व्यावसायिक वाहनों के सामने वाले मिरर पर चालक का नाम और मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से लिखना होगा। यह आदेश स्कूली गाड़ियों के लिए भी है। इस नियम को लेकर प्रतिदिन सड़कों पर जांच पड़ताल की जा रही है। – एसएन मिश्र, एमवीआई, भागलपुर।

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By न्यूज़ डेस्क

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