भागलपुर के जिस यूनिवर्सिटी में कमल किशोर चपरासी की नौकरी करते थे, उसी में अब वे असिस्टेंट प्रोफेसर होंगे। 2018 में नेट क्वालीफाई करने के बाद अब उनका चयन असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए किया गया है। इससे पहले वे इसी विश्वविद्यालय में नाइट गार्ड की ड्यूटी करते थे। उनके पिता भागलपुर में चाय बेचते हैं।
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कमल किशोर(42) ने वर्ष 2003 में तिलकामांझी विश्वविद्यालय के मुंगेर स्थित आरडी एंड डीजे कॉलेज में नाइट गार्ड की नौकरी की। उसके बाद उन्हें अंबेडकर विचार और सामाजिक कार्य विभाग (स्नातकोत्तर) में भेजा गया। उसी समय 2008 में उन्हें चपरासी बनाया गया। इस दौरान उन्होंने इसी यूनिवर्सिटी से अपनी पीजी की पढ़ाई पूरी की।
कमल ने बताया कि 2007 से 2009 के बीच पीजी की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद 2013 में पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया। थिसस जमा करने के बाद 2019 में पीएचडी डिग्री मिली। वहीं 2018 में मैंने नेट क्वालीफाई किया था। 2020 में जब बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (बीएसयूएससी) ने टीएमबीयू में संबंधित विभाग में सहायक प्रोफेसर के चार पदों के लिए रिक्तियों का विज्ञापन निकाला। बारह उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था, लेकिन मंडल का चयन टीएमबीयू के उसी अंबेडकर विचार और सामाजिक कार्य विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने एक चपरासी के रूप में कार्य किया था। उनके चयन का परिणाम 19 मई, 2022 को घोषित किया गया था।


2009 में उन्होंने पीएचडी करने की अनुमति मांगी लेकिन विभाग ने तीन साल बाद 2012 में अपनी सहमति दे दी। कमल ने बताया कि उन्होंने प्रोफेसर संजय जयसवाल के अंदर रिसर्च किया, जो मारवाड़ी कॉलेज के प्रोफेसर थे। कमल कहते हैं कि संजय सर ने ही मुझे ये मुकाम हासिल करने का हौसला दिया। उन्होंने मुझे कहा कि तुम्हारे पास खोने को कुछ भी नहीं है, लेकिन पाने को बहुत कुछ है। तुम बस मेहनत करो मंजिल जरूर मिलेगी।
चाय बेचते थे पिता, इसलिए की चपरासी की नौकरी
कमल किशोर ने बताया कि जब वो छात्र थे तो उनके घर की स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके पिता गोपाल मंडल की चाय की दुकान थी। उसी से उनके पूरे परिवार का घर चलता था। जिसकी वजह से उन्हें दरबान की नौकरी करनी पड़ी थी। कमल किशोर कहते है कि उनके अंदर पढ़ने की ललक थी। उन्हें आगे कुछ बनना था इसलिए उन्होंने अपने पढ़ाई जारी रखी। वे कहते हैं कि आज की तारीख में हम सब मिलकर कमाते हैं, तो हमलोग अच्छे से रह रहें हैं और अच्छे से खा पी रहें हैं।

ज्वाइनिंग से पहले हो रही है जांच
हालांकि, कमल किशोर के चयनित के होने के बाद फिलहाल ज्वाइनिंग में मामला फंस गया है। ज्वाइनिंग से पहले इंट्रेक्शन के दौरान यह सवाल सामने आने लगा कि आखिर कमल किशोर ने ड्यूटी के दौरान पढ़ाई कैसे की। इसके लिए वीसी प्रो. जवाहर लाल ने मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई थी। कमेटी ने मंगलवार को ही अपनी रिपोर्ट सौंप दी। सूत्रों की माने तो कमेटी ने कमल किशोर को क्लीन चिट दे दिया है। इस दौरान कमल की सराहना भी हुई है।
जांच में कमल ने कमेटी को बताया था कि वो नाइट शिफ्ट में ड्यूटी करने के बाद दिन में पढ़ाई करता था। कमल का कहना है कि उसने उस वक्त यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के लिए अनुमति भी लिया था। कमेटी ने इसी आधार पर उसे आरोप मुक्त करने की बात कही है। अब संभवत कुछ ही दिनों में कमल किशोर मंडल को असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर बहाल कर दिया जाएगा।
