शहर की पुलिसिंग में बदलाव किया गया है। यहां महानगरों के तर्ज पर दिन और रात में पुलिस पेट्रोलिंग शुरू की गई है। एसएसपी द्वारा गठित विशेष पेट्रोलिंग व वाहन चेकिंग टीम लगातार शहर में घूम रही है। इसके परिणाम भी मिलने लगे हैं। शराब, हथियार और अपराधी पकड़े जा रहे हैं। थानों की नियमित गश्ती के इतर विशेष पेट्रोलिंग टीम गश्ती करती है। यह टीम सीधे एसएसपी के अधीन काम करती है। सूचना मिलने पर बिना थाने को बताए यह टीम छापेमारी करती है। इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी इसे लीड करते हैं। त्योहार को देखते हुए शहर की पुलिसिंग में यह बदलाव किया गया है, जिसके अच्छे परिणाम भी मिल रहे हैं। थानों की गश्ती जब खत्म हो जाती है, तब भी यह टीम पेट्रोलिंग करती है। मार्निंग गश्ती के कारण सुबह ट्रेन पकड़ने स्टेशन जाने वाले और स्टेशन से घर लौटने वाले यात्री निरापद यात्रा कर रहे हैं।

एसएसपी के अधीन काम करती है यह टीम, बिना थाने को बताए होती है छापेमारी विशेष पेट्रोलिंग टीम की उपलब्धि

केस-1

28 सितंबर को विशेष पेट्रोलिंग टीम ने सेंट्रल जेल के पास बुलेट सवार तीन युवकों को हथियार और गोली के साथ गिरफ्तार किया था। पकड़े गए आरोपियों में आयुष कुमार, सिद्धार्थ कुमार दोनों पकरा, नवगछिया और उज्जवल आनंद, तेलघी, खरीक शामिल थे। बुलेट पर ट्रिपल लोड देख टीम को शक हुआ तो जांच के लिए रोका गया। आयुष के बैग से हथियार और गोली मिला। आयुष किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था। वह देवघर जा रहा था। दोनों दोस्त उसे बुलेट से बस स्टैंड छोड़ने जा रहे थे।

केस-2

29 सितंबर को विशेष पेट्रोलिंग टीम ने कोयला घाट में गंगा किनारे छापेमारी कर झाड़ियों से नौ कार्टन विदेशी शराब बरामद किया था। इस सिलसिले में पुलिस ने मोहल्ले के लालू यादव को गिरफ्तार किया था। लालू आदतन तस्कर है और पहले भी पकड़ा जा चुका है। वह घर शराब की डिलेवरी करता है और ग्राहकों से उसकी मुंह मांगी कीमत लेता है। जबकि कुछ ग्राहक गंगा किनारे आकर उससे शराब ले जाते हैं। दिन भर वह गंगा किनारे मवेशी चराता है और ग्राहकों पर नजर रखता है।

हर थाना क्षेत्र में क्राइम सेंटर किये गए हैं चिह्नित

हर थाना क्षेत्रों में क्राइम सेंटर चिह्नित किये गए हैं। वैसे स्थान जहां, अक्सर घटनाएं घटती है, उन्हें क्राइम सेंटर माना गया है। गश्ती के दौरान चिह्नित क्राइम सेंटर पर रुकना अनिवार्य है। इन चिह्नित स्थानों पर अक्सर अड्डेबाजी होती है। गश्ती के दौरान पुलिस एेसे अड्डेबाजी करने वाले लोगों को रोक-टोक करती है। खास कर रात्रि गश्ती के दौरान इसे अनिवार्य रूप से लागू किया गया है। यह टीम बाइक से भी गली-मोहल्ले में गश्ती करती है। हर थाने को भी दो-दो बाइक दी गई है, जिसपर एक जवान और एक अफसर रात में उन इलाकों में गश्ती कर रहे हैं, जहां थाने की जीप की पहुंच नहीं पहुंच पाती है। रात्रि गश्ती में बीट सिस्टम को प्रयोग के तौर पर लागू किया गया।

भागलपुर में अब तक बीट सिस्टम लागू नहीं था। लेकिन रात्रि गश्ती में इसे प्रयोग के तौर पर लागू किया गया है। हर मोहल्ले और वार्ड की जिम्मेदारी हवलदार या जमादार स्तर के पुलिसकर्मियों पर होगी। यानी ये पुलिसवाले अपने-अपने वार्ड या मोहल्ले के प्रभारी होंगे। किसी भी तरह की वारदात होने पर सबसे पहले इनसे ही से पूछा जाएगा। नियमित रूप से बीट प्रभारी अपने-अपने इलाके की गश्ती करेंगे। उनके इलाके में कौन अपराधी है, जेल में है या बाहर, इसकी भी जानकारी रखेंगे। दिल्ली समेत अन्य महानगरों में बीट सिस्टम के जरिए पुलिसिंग होती है। थानेदार भी पहले बीट प्रभारी से ही जानकारी लेंगे कि क्या घटना घटी है।

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By न्यूज़ डेस्क

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