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भागलपुर : सूबे के जिलों में विधि व्यवस्था और गंभीर कांडों के त्वरित अनुसंधान के लिए अलग अलग यूनिट बनाने की कवायद शुरू हो गई है। भागलपुर रेंज के जिलों में भी इस व्यवस्था को शुरू करने के लिए सोमवार को रेंज डीआइजी विकास वैभव ने क्षेत्रीय समिति की बैठक में अपनी मुहर लगा दी। उन्होंने भागलपुर एसएसपी आशीष भारती, बांका एसपी चंदन कुमार कुशवाहा, नवगछिया एसपी निधि रानी के साथ बैठक कर कई निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि रेंज स्तर से यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। रेंज के एसएसपी और एसपी को निर्देश दिया गया है कि वे अपने जिले में स्पेशल इंवेस्टीगेशन यूनिट (एसयूआइ) को लेकर दिए निर्देशों को जल्द लागू करें।


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भागलपुर में केस की संख्या के कारण होगी 24 यूनिट

रेंज के जिलों में स्पेशल यूनिट के लिए थानों को चिन्हित कर लिया गया है। भागलपुर के कोतवाली थाने, जोगसर ओपी, तिलकामांझी ओपी, बरारी ओपी, तातारपुर थाना, मोजाहिदपुर थाना, बबरगंज ओपी, गोराडीह ओपी, सबौर थाना, सन्हौला, मधुसूदनपुर, ललमटिया ओपी, शाहकुंड, सजौर ओपी, कहलगांव, घोघा, पीरपैंत थाना, इशाकचक थाना, औद्योगिक और लोदीपुर थाने में एक-एक ईकाई होगी। जबकि नाथनगर, जगदीशपुर, सुल्तानगंज थाने में केस की संख्या देख दो-दो यूनिट होंगी।

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बांका और नवगछिया में होगी छह-छह यूनिट

स्पेशल इंवेस्टीगेशन यूनिट के लिए बांका और नवछिया में छह-छह यूनिट होंगी। इसके लिए भी बांका एसपी और नवगछिया एसपी की अनुशंसा पर डीआइजी ने अपनी मुहर लगा दी है। बांका के बांका थाना, रजौन थाना, बौंसी थाना, धोरैय्या थाना, अमरपुर थाना और बेलहर थाना में एक-एक यूनिट बनाई गई है। वहीं नवगछिया में आदर्श थाना नवगछिया में दो यूनिट जबकि रंगरा ओपी, खरीक थाना, बिहपुर थाना, झंडापुर ओपी और भवानीपुर ओपी में एक-एक यूनिट के प्रस्ताव पर मुहर लगी है।

अफसरों और पदाधिकारियों को भी किया गया चिन्हित

रेंज के जिलों के स्पेशल यूनिट के लिए अफसरों और पदाधिकारियों को भी चिन्हित कर लिया गया है। इस यूनिट में भागलपुर में 18 इंस्पेक्टर, 96 दारोगा और 96 एएसआइ कार्य करेंगे। जबकि बांका में एक इंस्पेक्टर, 18 दारोगा और 11 एएसआइ कार्य करेंगे। वहीं नवगछिया में सात इंस्पेक्टर 41 दारोगा और 36 एएसआइ को रखा गया है। तीनों एसपी ने विशेष यूनिट के लिए करीब 567 लोगों का नामों की अनुशंसा की थी। मगर इसमें 324 पुलिसकर्मी ही योग्य पाए गए है।

कैमरा और फोरेंसिक किट के साथ पहुंचेंगे घटनास्थल पर

रेंज डीआइजी ने बताया कि स्पेशल यूनिट को एक अलग वाहन, फारेंसिक किट और कैमरा उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रत्येक यूनिट में जरूरत के हिसाब से एक इंस्पेक्टर, दो दारोगा, दो एएसआइ और दो हवलदार, सिपाही तैनात होंगे। यूनिट में शामिल पदाधिकारी और कर्मियों पर थानों में एसआर नेचर के केसों के अनुसंधान का जिम्मा होगा। उनसे विधि व्यवस्था से जुड़ा कार्य नहीं लिया जाएगा। यदि विशेष परिस्थिति में उनकी आवश्यकता होगी तो डीएसपी के अनुशंसा पर एसपी उन्हें अलग कार्य में लगा सकते हैं। वहीं संबंधित थानेदारों के जिम्मे जांच और लॉ एंड आर्डर दोनों के कार्य पूर्व की तरह होंगे।

क्या है स्पेशल इंवेस्टीगेशन यूनिट

जिलों में किसी भी गंभीर कांड दर्ज होने के बाद विधि व्यवस्था में लगी पुलिस को इसके अनुसंधान में काफी बाधा पहुंचती है। इस लेकर राज्य में काफी संख्या में गंभीर कांड लंबित पड़े हुए हैं। अनुसंधान प्रभावित होने के बाद अपराधियों को सजा दिलाने में भी परेशानी होती है। ऐसे में अलग यूनिट को जिम्मेदारी देने से जांच में काफी आसानी होगी और पेंडिंग की संख्या में कमी आएगी। स्पेशल यूनिट को एसआर के साथ नॉन एसआर मामले के भी अनुसंधान में लगाया जा सकता है।

डीआइजी विकास वैभव ने कहा कि रेंज के जिलों में स्पेशल इंवेस्टीगेशन यूनिट (एसयूआइ) के लिए थानों और ओपी को चिन्हित कर लिया गया है। यूनिट के लिए योग्य पाए गए पुलिसकर्मियों के तैनाती की अनुशंसा स्वीकार कर ली गई है। रेंज के एसएसपी, एसपी को 10 अक्टूबर से पहले इसे शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

By न्यूज़ डेस्क

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