मुंदीचक स्थित गढ़ैया दुर्गा मंदिर का पंडाल व सजावट हर साल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है। इस बार बंगाल के कारीगरों द्वारा मथुरा के लक्ष्मीनारायण मंदिर की आकृति का पंडाल बनाया जा रहा है। यहां की सजावट भी काफी आकर्षक होती है। पूजा कमेटी के द्वारा लगभग एक किलोमीटर तक लाइट व सजावट की व्यवस्था होती है।

पूजा समिति के सचिव कुमार धर्मेंद्र ने बताया कि गढ़ैया दुर्गा मंदिर में 1958 से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित हो रही है। मुंदीचक के समाजसेवी स्व. अमरनाथ सिन्हा, शंकर साह, महेंद्र मंडल आदि के द्वारा पहली बार यहां पूजा शुरू हुई थी। उस समय पेट्रोमेक्स जलाकर पूजा की जाती थी। वक्त के साथ पूजा में काफी बदलाव आया है। मंदिर के आसपास मेला का भी आयोजन होता है।

प्रतिमा का निर्माण शुरू: मंदिर में प्रतिमा निर्माण शुरू हो गया है। पहले अम्बे के मूर्तिकार रामशरण पंडित मूर्ति बनाते थे। अब उनका बेटा रंजीत पंडित प्रतिमा बनाते हैं।

दुर्गा पूजा के दौरान पिछले दो सालों से अब सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जा रहा है। इससे पहले यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम होता था। वहीं पहली पूजा से लेकर नवमी पूजा तक धाराप्रवाह दुर्गा संपूर्ण पाठ का आयोजन किया जायेगा। पंडित विश्वम्बर झा के द्वारा पूजा संपन्न कराया जायेगा। इनके आलावे भी कई पंडित रहते हैं।

सुरक्षा व्यवस्था के लिए 11 सीटीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लिया गया है। सचिव ने बताया कि यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ पंडाल देखने आते हैं। इसलिए सुरक्षा को पुख्ता किया गया है। इसके साथ स्थानीय पुलिस का सहयोग मिलता है। -राजेश मंडल, अध्यक्ष, गढ़ैया दुर्गा मंदिर समिति

पूजा समिति के सचिव ने बताया कि अष्टमी पूजा से भंडारा शुरू हो जाता है। अष्टमी को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। नवमी को हलुआ व पूड़ी तथ दशमी को दही, चूड़ा व बुंदिया का भोग लगाया जायेगा। भंडारे में मोहल्ले समेत आसपास के श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसका भक्तों को काफी इंतजार रहता है। भंडारे में युवाओं और बच्चों का उत्साह देखते बनता है।

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By न्यूज़ डेस्क

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