भागलपुर. पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए आतंकी हमले में शहीद भागलपुर के कहलगांव स्थित मदारगंज के जवान रतन कुमार ठाकुर के पिता राम निरंजन सिंह आज सुबह 10.30 बजे जैसे ही अपने पैतृक गांव पहुंचे, फफक पड़े। उनके घर जुटी भीड़ देखते ही वे दहाड़ मारकर रोने लगे और बेहोश होकर गिर पड़े। जैसे-तैसे लोगों ने उन्हें संभाला। लेकिन गांव का हर शख्स की आंखें वृद्ध पिता की हालत देख कर आंखें नम हो गईं।
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होश में आने के बाद पिता ने खुद को संभाला और कहा, पाकिस्तान आतंक फैला रहा है। मेरे बेटे की शहादत का दु:ख है, लेकिन पूरे गांव को उस पर गर्व है। मैं अपने दूसरे बेटे को भी देश पर न्योछावर करने को तैयार हूं। लेकिन पाकिस्तान को सबक सिखाना होगा। बोलते-बोलते उनकी आवाज भर आई। उन्होंने कहा, मैं इस हालत में खुद अपने ऊपर बारूद भरकर हेलिकॉप्टर से पाकिस्तान में कूदने को भी तैयार हूं। पाकिस्तान में कोई बचना नहीं चाहिए।

गांव में एक ओर गुस्सा, दूसरी ओर शोक
आतंकियों के इस कायराना हमले से ग्रामीण एक ओर उबले तो दूसरी ओर शोक में डूबे रहे। पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे से पूरा गांव गूंजता रहा। लेकिन गांव में पसरा शोक दिल दहलाता रहा। शहीद रतन के 80 वर्षीय दादा रिटायर्ड शिक्षक विश्वनाथ ठाकुर व दादी कौशल्या देवी बदहवास हो गई।
अब किसे कहेंगे रतना
दादा ने भरी आंखों और बुझे मन से बताया, गुरुवार रात 12 बजे दूसरी बहू रूबी देवी ने बताया कि रतन अब इस दुनिया में नहीं रहा। तब से उसके बचपन की एक-एक याद मेरी आंखों के सामने नाच रही है। दादी बोलीं, रतन काली पूजा में मदारगंज आया था। मार्च में आने की बात कही थी। अब हम रतना किसे कहेंगे? यह कहते हुए वह दहाड़ मारकर रोने लगी। शहीद जवान की चाची रूबी देवी व सभी भाई-बहन का रो-रोकर बुरा हाल है।

पत्नी के गांव पहुंचते ही रो पड़ा मदारगंज गांव
शहीद रतन की पत्नी काजल उर्फ राजनंदनी अपने बेटे कृष्णा, भाई अर्पण और मां कविता देवी के दोपहर 12.30 बजे मदारगंज गांव पहुंचते ही रो पड़ी। उसका चीत्कार ने सभी को रुला दिया।

तख्तियां लेकर ग्रामीणों ने निकाली रैली लगाए पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे
शहीद सीआरपीएफ जवान रतन कुमार ठाकुर के सम्मान में मदारगंज, काझा, घुठयानी, अमडंडा, भवानीपुर, संथाली टोला आदि गांवों के लोगों ने रैली निकाली। उनके हाथों में पाक विरोधी नारे लिखी तख्तियां थी और वे पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे।

