भागलपुर में मानसून कमजोर पड़ जाने की वजह से बारिश नहीं हो रही है। हालांकि 26 व 27 जून को बारिश होने की संभावना है। इसके बाद 30 जून तक कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

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बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के मौसम वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र कुमार ने बताया कि मानसून के कमजोर पड़ने के कारण ही बारिश नहीं हो रही है। यहां 21 जून को ही मानसून प्रवेश कर गया था। एक दिन रहने के बाद बाहर चला गया। पश्चिम बंगाल में मानूसन 18 से 21 जून तक रूका था। पूर्वानुमान के तहत भागलपुर जिले में 21 व 22 जून को 12.2 मिलीमीटर बारिश हुई। अभी तक जून में कम बारिश हुई है लेकिन जुलाई में अधिक होगी। यहां जुलाई, अगस्त व सितम्बर तक बारिश होने की संभावना है। उधर, मौसम में बदलाव के कारण तापमान में दो डिग्री सेल्सियस का अंतर आया है। तीन-चार दिन पहले जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस था, वहीं तापमान गिरकर अब 36 से 37 डिग्री सेल्सियस तक आ गया है। हालांकि मंगलवार को तेज गर्म हवा चल सकती है।

10 दिनों से बारिश की राह देख रहे किसान

मानसून के धोखे से पूर्व बिहार के किसानों के चेहरे पर फिर चिंता की लकीरें लंबी होने लगी हैं। 12 जून से मानसून का इंतजार करते-करते 24 जून बीत गया। आलम यह है कि बारिश के बूंदों के सहारे किसान बिचड़े की भी बुआई नहीं कर सके हैं। बोरिंग के सहारे बिचड़ा बोने वालों को छोड़ दें तो अब भी लगभग 80 प्रतिशत किसान बारिश के इंतजार में हैं।

कृषि विभाग के अधिकारी भी अब यह मान चुके हैं कि बिचड़ा लेट हो गया है। सुखाड़ और किसानों की उम्मीदों के बीच बस जुलाई में मौसम का रुख देखना शेष रह गया है। इस बाबत जिला कृषि पदाधिकारी केके झा बताते हैं कि अगर जुलाई में अच्छी बारिश हो गई तो धान की उपज पर बिचड़ा के विलंब होने का असर नहीं होगा। क्योंकि 10 से 12 दिनों के बिचड़े से भी रोपनी करायी जा सकती है।

हालांकि उनका कहना है कि अगर विलंब से बारिश होती है तो बिचड़े के विकल्प के रूप में जीरो टिलिंग और धान की सीधी बुआई करायी जा सकती है। सुल्तानगंज प्रखंड के अशियाचक निवासी किसान रंजन कुमार सिंह बताते हैं कि सिर्फ बोरिंग के भरोसे धान की खेती नहीं हो सकती है। भीरखुर्द पंचायत के मुखिया संजीव कुमार सुमन ने बताया कि पानी का लेयर नीचे जाने से बोरिंग कारगर साबित नहीं हो रहा।

By न्यूज़ डेस्क

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