दिसंबर 2022 में 2 खास एकादशियां आ रही हैं, जो पहली मोक्षदा एकादशी और दूसरी सफला एकादशी पड़ेगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार मोक्षदा एकादशी मोक्ष देने वाली मानी गई है, इसे मौन एकादशी भी कहते हैं। दूसरी सफला एकादशी को सफलता देने वाली एकादशी मानी जाती है।


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मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती एक दिन ही पड़ती है। मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली एक पवित्र तिथि मानी जाती है, जिसके नाम से ही स्पष्ट है कि इस एकादशी का संबंध मोक्ष से है। आइए जानते हैं इस एकादशी के बारे में-

मोक्षदा एकादशी कथा-

इस एकादशी की पौराणिक कथा के अनुसार गोकुल नाम के नगर में वैखानस नामक राजा राज्य करता था। उसके राज्य में चारों वेदों के ज्ञाता ब्राह्मण रहते थे। वह राजा अपनी प्रजा का पुत्रवत पालन करता था। एक बार रात्रि में राजा ने एक स्वप्न देखा कि उसके पिता नरक में हैं। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ। प्रात: वह विद्वान ब्राह्मणों के पास गया और अपना स्वप्न सुनाया।

कहा- मैंने अपने पिता को नरक में कष्ट उठाते देखा है। उन्होंने मुझसे कहा कि- हे पुत्र मैं नरक में पड़ा हूं। यहां से तुम मुझे मुक्त कराओ। जब से मैंने ये वचन सुने हैं तब से मैं बहुत बेचैन हूं। चित्त में बड़ी अशांति हो रही है। मुझे इस राज्य, धन, पुत्र, स्त्री, हाथी, घोड़े आदि में कुछ भी सुख प्रतीत नहीं होता। क्या करूं?

राजा ने कहा– हे ब्राह्मण देवताओं! इस दु:ख के कारण मेरा सारा शरीर जल रहा है। अब आप कृपा करके कोई तप, दान, व्रत आदि ऐसा उपाय बताइए जिससे मेरे पिता को मुक्ति मिल जाए। उस पुत्र का जीवन व्यर्थ है जो अपने माता-पिता का उद्धार न कर सकें। एक उत्तम पुत्र जो अपने माता-पिता तथा पूर्वजों का उद्धार करता है, वह हजार मूर्ख पुत्रों से अच्छा है। जैसे एक चंद्रमा सारे जगत में प्रकाश कर देता है, परंतु हजारों तारे नहीं कर सकते।

ब्राह्मणों ने कहा– हे राजन! यहां पास ही भूत, भविष्य, वर्तमान के ज्ञाता पर्वत ऋषि का आश्रम है। आपकी समस्या का हल वे जरूर करेंगे। यह सुनकर राजा मुनि के आश्रम पर गया। उस आश्रम में अनेक शांत चित्त योगी और मुनि तपस्या कर रहे थे। उसी जगह पर्वत मुनि बैठे थे। राजा ने मुनि को साष्टांग दंडवत किया। मुनि ने राजा से कुशलता के समाचार लिए।

राजा ने कहा कि महाराज आपकी कृपा से मेरे राज्य में सब कुशल हैं, लेकिन अकस्मात मेरे चित्त में अत्यंत अशांति होने लगी है। ऐसा सुनकर पर्वत मुनि ने आंखें बंद की और भूत विचारने लगे। फिर बोले हे राजन! मैंने योग के बल से तुम्हारे पिता के कुकर्मों को जान लिया है। उन्होंने पूर्व जन्म में कामातुर होकर एक पत्नी को रति दी, किंतु सौत के कहने पर दूसरे पत्नी को ऋतु दान मांगने पर भी नहीं दिया। उसी पाप कर्म के कारण तुम्हारे पिता को नरक में जाना पड़ा।

तब राजा ने कहा इसका कोई उपाय बताइए। मुनि बोले- हे राजन! आप मार्गशीर्ष एकादशी का उपवास करें और उस उपवास के पुण्य को अपने पिता को संकल्प कर दें। इसके प्रभाव से आपके पिता की अवश्य ही नरक से मुक्ति होगी। मुनि के ये वचन सुनकर राजा महल में आया और मुनि के कहने अनुसार कुटुंब सहित मोक्षदा एकादशी का व्रत किया। इसके उपवास का पुण्य उसने पिता को अर्पण कर दिया।

एकादशी व्रत के प्रभाव से उसके पिता को मुक्ति मिल गई और स्वर्ग में जाते हुए वे पुत्र से कहने लगे- हे पुत्र तेरा कल्याण हो। यह कहकर स्वर्ग चले गए।

भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी का व्रत जो लोग करते हैं, उनके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। इस कथा को पढ़ने या सुनने से वायपेय यज्ञ का फल मिलता है। यह व्रत चिंतामणी के समान सभी कामनाएं पूर्ण करने वाला तथा मोक्ष देने वाला है। अत: इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के सभी पाप नष्ट होकर अंत में मोक्ष मिलता है।

मोक्षदा एकादशी व्रत 3 तथा 4 दिसंबर के शुभ मुहूर्त-mokshada ekadashi muhurat

  • मोक्षदा एकादशी (स्मार्त) : शनिवार, 3 दिसंबर, 2022 को
  • एकादशी तिथि का प्रारंभ- 3 दिसंबर, 2022 को 05.39 ए एम से शुरू
  • एकादशी तिथि का समापन- 4 दिसंबर, 2022 को 05.34 ए एम तक।
  • मोक्षदा एकादशी पारण/ व्रत तोड़ने का समय- 4 दिसंबर को, 01.14 पी एम से 03.19 पी एम
  • मोक्षदा एकादशी (वैष्णव) रविवार, 4 दिसंबर, 2022 को
  • वैष्णव एकादशी तिथि का प्रारंभ- 3 दिसंबर, 2022 को 05.39 ए एम से शुरू।
  • एकादशी का समापन- 4 दिसंबर, 2022 को 05.34 ए एम पर।
  • वैष्णव एकादशी व्रतधारियों के लिए पारण का समय- 5 दिसंबर को, 06.59 ए एम से 09.04 ए एम तक।

दिन का चौघड़िया

  • शुभ- 08.16 ए एम से 09.34 ए एम
  • लाभ- 01.29 पी एम से 02.47 पी एम
  • अमृत- 02.47 पी एम से 04.06 पी एम

रात का चौघड़िया

  • लाभ- 05.24 पी एम से 07.06 पी एमकाल रात्रि
  • शुभ- 08.48 पी एम से 10.29 पी एम
  • अमृत- 10.29 पी एम से 04 दिसंबर 12.11 ए एम,
  • लाभ- 05.17 ए एम से 4 दिसंबर 06.59 ए एम

महत्व : मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष महीने में शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। मोक्षदा एकादशी की तुलना मणि चिंतामणि से की जाती है, जो सभी मनोकामनाएं पूरी करती है। इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत में अर्जुन को श्रीमद्‍भगवद्‍गीता का उपदेश दिया था। इस एकादशी व्रत के प्रभाव से कई जन्मों के पापों का नाश होता है तथा पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इतना ही नहीं व्रतधारी को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति भी होती है। मोक्ष की प्रार्थना के लिए यह एकादशी बहुत अधिक महत्व की मानी जाती है। मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती एक दिन आती है। इस दिन श्री‍हरि विष्णु जी के अलावा भगवान श्री कृष्ण का पूजन करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है तथा पूर्वजों को स्वर्ग तक पहुंचने में मदद मिलती है।

पूजा विधि-

– मोक्षदा एकादशी के दिन सुबह जल्दी जागकर स्नानादि से निवृत होकर व्रत शुरू करने का संकल्प लें।

– तत्पश्चात घर के मंदिर की साफ-सफाई करें।

– फिर पूरे घर में गंगा जल का छिड़क दें।

– अब भगवान को गंगा जल से स्नान करवाकर वस्त्र अर्पित करें।

– प्रतिमा को रोली अथवा सिंदूर का टीका लगाएं।

– तुलसी के पत्ते और पुष्प चढ़ाएं।

– पूजन के शुरुआत में श्री गणेश की आरती करें।

– भगवान श्री विष्णु का विधि-विधान से पूजन करें।

– फिर मोक्षदा एकादशी की कथा पढ़ें अथवा सुनें।

– शुद्ध देशी घी का दीप प्रज्ज्वलित करें।

– लक्ष्मी देवी के साथ श्रीहरि विष्णु जी की आरती करें।

– भगवान को भोग में ताजे मौसमी फल और मेवे अर्पित करें।

– दिनभर उपवास रखकर अगले दिन सुबह पारण करें।

उपाय-

1. मोक्षदा एकादशी सभी एकादशियों में विशेष और समस्त पापों को नष्‍ट करने वाली, मानसिक शांति देने वाली और पापनाशक मानी गई है। इस तिथि के स्वामी श्री विष्णु है, अत: इस दिन पूरे मनपूर्वक इनका पूजन करने से जीवन में पुण्य फल प्राप्त होता है।

2. यह एकादशी पितरों को मुक्ति के लिए बहुत खास हैं, अत: जिन पितरों को मोक्ष प्राप्त नहीं हुआ या जो नरक में गए हैं, उनके लिए आज के दिन एक लोटे पानी में थोड़े-से काले तिल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितृ तर्पण करने से पितरों को वैकुंठ की प्राप्ति होती है।

3. मोक्षदा एकादशी व्रत सर्वश्रेष्ठ और कल्याणकारी माना गया है। अत: मार्गशीर्ष ग्यारस के दिन एकादशी व्रत नियमानुसार रखने तथा पितरों के लिए मुक्ति मांगने से जीवन में अशुभता का नाश होकर शुभ फलों मिलते हैं। यह व्रत उपवासकर्ता का यश संसार में सर्वत्र फैलाता है तथा पापों को नष्ट करके मोक्ष दिलाने के लाभदायी है।

4. इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को रणभूमि में उपदेश दिया था। अतः व्रत रखकर रात्रि में गीता पाठ पढ़ने या गीता प्रवचन सुननने और मंत्र जाप करते हुए जागरण करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होकर मोक्ष तथा जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।

5. मोक्षदा एकादशी के दिन पीली वस्तुओं से भगवान श्री विष्णु का पूजन पूर्ण श्रद्धा के साथ करके उपवास रखने मात्र से मनुष्य की हर मनोकामना पूर्ण होती है।

By न्यूज़ डेस्क

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