शहीद रतन की पत्नी राजनंदिनी देवी पति के शव का अंतिम दर्शन करने के लिये कहलगांव श्मशान घाट पर परिजनों के साथ पहुंची। बदहवास राजनंदिनी बार बार अनुरोध करती रही कि कोई तो एक बार मेरे पति के शव को देखने में मदद करे।
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उन्हें सहारा देकर वाहन से उतारकर कॉफिन के पास लाया गया। साथ आई महिलाएं राजनंदिनी की चूड़ियां फोड़ने का प्रयास करने लगी तो उन्होने विरोध करते कहा कि जबतक वे पति के शव को नहीं देख लेंगी तबतक चूड़ियां नहीं तोड़ने देंगी। कुछ देर तक वह कॉफिन को पकड़कर बैठी रहीं लेकिन कॉफिन को उनके सामने नहीं खोला गया।इस दौरान राजनंदिनी को मुच्र्छा भी आ गई।

आखिरकार एक महिला ने जबरन उनकी चूड़ियां तोड़ दी जिसका राजनंदिनी ने पुरजोर विरोध भी किया। और उसके बाद उन्हें कई महिलाओं ने पकड़कर वाहन में बैठा दिया। वाहन में बैठने के क्रम में भी वह काफी विरोध करती रही और कहती रही कि एक बार तो पति का चेहरा देखने दें। बताया गया कि शव इतना क्षत विक्षत हो गया था कि उसे दिखाना उचित नहीं था।

