टीएमबीयू ने एक्ट से बाहर जाकर धड़ाधड़ जितने ओएसडी बनाए थे, अब राजभवन के आदेश के बाद सभी को एकसाथ हटा दिया है। संभवत: राज्य भर के विवि में टीएमबीयू अकेला एेसा विवि था जिसने बड़ी संख्या में ओएसडी बनाए थे। हालांकि विवि ने अपनी ओर से यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसने कितने ओएसडी बनाए थे जिन्हें हटाया है। विवि की ओर से जारी इसकी अधिसूचना भी गोलमोल है। विवि ने अधिसूचना जारी की है कि राजभवन के आदेश को देखते हुए ओएसडी की नियुक्त के लिए पूर्व में जारी की गईं अधिसूचनाएं रद्द की जाती हैं। लेकिन इसमें विवि ने संख्या नहीं बताई है कि कितने ओएसडी बनाए गए थे। लेकिन जानकार बताते हैं कि आधा दर्जन से अधिक ओएसडी बनाए गए थे। विवि के रजिस्ट्रार ने ओएसडी हटाने की अधिसूचना 15 सितंबर को जारी की और विवि के पीआरओ डॉ. एसएन चौधरी ने इसे 17 सितंबर को सार्वजनिक किया।
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इन्हें बनाया गया था ओएसडी
डॉ. आनंद कुमार झा परीक्षा विभाग, डॉ. संजय झा परीक्षा विभाग, डॉ. शंभु दत्त झा शोध शाखा, डॉ. केएम सिंह एकेडमिक ओएसडी, डॉ. रामसेवक सिंह ओएसडी प्रोफेशनल कोर्स, डॉ. पीके पाल। इधर लीगल ओएसडी का पद हाल के कुछ दिनों से रिक्त था।

मूल संस्थान में सेवा देंगे हटाए गए अोएसडी
इसे कुलपति के आदेश का पालन कहें या एक्ट की जानकारी का अभाव, सभी ओएसडी इस पर सेवा देते रहे जबकि विवि एक्ट में यह पद है ही नहीं। आश्चर्य यह कि सभी ओएसडी शिक्षक थे। ऐसे में उम्मीद की जाती है कि इन्हें एक्ट की जानकारी होनी चाहिए। लेकिन शायद इन्हें एक्ट की जानकारी नहीं थी या थी तो कुलपति के आदेश का पालन करना इन्होंने बेहतर समझा। विवि ने इन्हें अब इस पद से हटाने के साथ इनके मूल संस्थान में सेवा देने को कहा है।

क्या डीओ और बजट ऑफिसर भी बदलेंगे?
राजभवन के इस आदेश के बाद कि चूंकि विवि एक्ट में ओएसडी का पद नहीं है, इसलिए इन्हें हटाया जाए और अस्वीकृत पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जाए, सवाल उठने लगा है कि क्या डीओ और बजट ऑफिसर के पद पर भी बदलाव होगा। बिहार राज्य विवि एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के प्रक्षेत्रीय मंत्री सुशील मंडल ने कहा है कि डीओ और बजट ऑफिसर के पद तृतीय वर्गीय कर्मचारियों के लिए हैं। लेकिन विवि में लंबे समय से इन पदों पर शिक्षक नियुक्त होते रहे हैं।

