संतान की लंबी आयु के लिए दो अक्टूबर को जीवित्पुत्रिका या जिउतिया पर्व मनाया जायेगा। यह पर्व अश्रिन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन मां निर्जला उपवास पर रहकर पुत्र की लंबी आयु, आरोग्य के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत करेगी। महिलाएं मिट्टी तथा गाय के गोबर से चिल व सियारिन की प्रतिमा बनाकर उसके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाकर व्रत कथा सुनेगी।

रात्रि 2.41 में अष्टमी शुरू

पंडित दयानंद पाण्डेय ने कहा कि एक अक्टूबर की देर रात्रि 2.41 मिनट में अष्टमी प्रारंभ हो रहा है। इसका समापन दो अक्टूबर को देर रात 12.31 मिनट पर होगा। इसलिए व्रती महिलाओं को विशिष्ट भोजन या ओढगन एक अक्टूबर की देर रात्रि 2.41 से पहले करना होगा। फिर महिलाएं निर्जला उपवास पर रहेगी। तीन अक्टूबर को सूर्योदय के बाद वह पारण करेंगी।

कैसे करें व्रत

पंडित दयानंद पाण्डेय ने बताया कि व्रती गंगा स्नान कर संकल्प के साथ व्रती प्रदोष काल में गाय के गोबर से अपने प्रागंण का निपना चाहिए। फिर जमीन में तालाब खोदकर तालाब के निकट पाकड़ या पाकड़ का डाल खड़ा करें और कुश निर्मत जीमुतवाहन की मूर्ति जल में स्थापित कर पीली या लाल रूई से सजाये। इसके बाद धूप, दीप, अक्षत फूल व विविध प्रकार के निवेद्य से उसका पूजा करें।

कथा क्या है

जीवित्पुत्रिका व्रत के साथ जीमूतवाहन की कथा जुड़ी है। गंधर्वों के राजकुमार का नाम जीमूतवाहन था। जीमूतवाहन को राज्य को छोड़कर वन में पिता की सेवा करने चले गए। वहीं पर उनका मलयवती नामक राजकन्या से विवाह हो गया। एक दिन वन में जब भ्रमण कर रहे थे तो एक वृद्धा विलाप करती बोली मुझे एक ही पुत्र है। पक्षीराज गरुड़ के समक्ष नागों ने उन्हें प्रतिदिन भक्षण के लिए एक नाग सौंपने की प्रतिज्ञा हुई है। आज मेरे पुत्र शंखचूड़ की बलि का दिन है। इस जीमूतवाहन ने आश्वासन दिया कि वह उनके पुत्र की रक्षा करेगा। जीमूतवाहन ने गरूड़ को बलि देने के लिए चुनी गई वध्य शिला पर लेट गए। नियत समय पर गरूड़ आये लेकिन उनके आंख से आंसू व मुंह से आह निकलता नहीं देखकर उनका परिचय पूछा। तक जीमूतवाहन ने उन्हें सारी बाते बतायी। इस पर प्रसन्न होकर गुरूड़ ने उनको जीवन दान दे दिया तथा नागों की बलि न लेने का वरदान भी दे दिया। इस जीमूतवाहन के अदम्य साहस से नाग जाति की रक्षा हुई और तबसे पुत्र की सुरक्षा के लिए जीमूतवाहन की पूजा की प्रथा शुरू हुई।

https://youtu.be/H16FkvCMAgg

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By न्यूज़ डेस्क

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