नई दिल्ली : चुनावों से पहले सवर्णों को लुभाने के लिए मोदी सरकार ने एक बड़ा दांव खेला है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आर्थिक आधार पर पिछड़े सवर्णों को सरकार की तरफ से आरक्षण देने की बात कही गई है। हालांकि यह आगामी 2019 चुनावों के लिए सरकार का एजेंडा भी बताया जा रहा है।
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सूत्रों ने बताया कि सोमवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया है कि अब सवर्ण जातियों को 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। ये आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को दिया जाएगा। न्यूज 24 के सूत्रों ने बताया कि अभी सुप्रीम कोर्ट ने 50% आरक्षण की सीमा में किसी भी तरह की छेड़छाड़ से मना किया है, लेकिन सरकार के इस निर्णय के बाद उसे सवर्णों को आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन करना होगा। बताया जा रहा है कि सरकार की तरफ से सालाना 8 लाख से कम सैलेरी वालों को इस आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है।

अभी जो आरक्षण का प्रारूप है, उसके अनुसार, ओबीसी वर्ग में क्रीमी लेयर के लोगों को आरक्षण नहीं मिलता। माना गया है कि जिन लोगों की सालाना आय 8 लाख तक है, उस ओबीसी को आरक्षण की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह समक्ष है। ऐसे में क्रीमी लेने में आने वाले लोगों के बच्चों को आरक्षण नहीं मिलता है। उसी की तर्ज पर मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को आरक्षण का फायदा देने का निर्णय किया है।
बता दें कि 2018 में SC/ST एक्ट को लेकर जिस तरह सरकार ने मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया था, उससे सवर्ण खासा नाराज बताया जा रहा था। माना जा रहा है कि मंगलवार को मोदी सरकार संविधान संशोधन बिल संसद में पेश कर सकती है। बता दें कि मंगलवार को ही संसद के शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन है।

