नवगछिया (भागलपुर): नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र नवरात्र और काली पूजा के अवसर पर एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और तंत्र साधना का केंद्र बन गया है।
यहां के रंगरा स्थित बैसी काली मंदिर और नगरह महामशानी शक्तिपीठ दोनों ही इस समय धार्मिक आस्था और रहस्यमयी तांत्रिक साधना के प्रतीक बन चुके हैं।
नवरात्र के पवित्र दिनों में इन दोनों स्थलों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है — कोई मां काली से मन्नत मांगने आता है, तो कोई साधना के माध्यम से सिद्धि प्राप्त करने की कामना लेकर।


🔱 बैसी काली मंदिर: जहां मां काली पूरी करती हैं भक्तों की मुराद

रंगरा प्रखंड के बैसी गांव स्थित प्राचीन काली मंदिर की पहचान एक शक्तिशाली तांत्रिक स्थल के रूप में है।
स्थानीय मान्यता है कि यहां जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मां से अपनी मनोकामना मांगता है, मां उसकी हर इच्छा पूर्ण करती हैं।
इसी कारण यह मंदिर नवरात्र और काली पूजा के समय भक्तों से खचाखच भरा रहता है।

यह मंदिर न केवल श्रद्धा का केंद्र है बल्कि तांत्रिकों के लिए साधना स्थल भी है।
देश के विभिन्न हिस्सों से साधक यहां आते हैं और अष्टमी की रात को विशेष तांत्रिक अनुष्ठान करते हैं।
कहा जाता है कि इस रात की साधना में मां काली का आशीर्वाद शीघ्र प्राप्त होता है।
पिछले कुछ वर्षों में यह स्थान धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिल रहा है।


🕉️ नगरह महामशानी शक्तिपीठ: तंत्र साधना का पवित्र स्थल

नवगछिया का नगरह महामशानी शक्तिपीठ भी उतना ही प्रसिद्ध और रहस्यमयी स्थान है।
यहां हर वर्ष शारदीय नवरात्र की अष्टमी की रात को विशेष तंत्र पूजा का आयोजन किया जाता है।
तांत्रिक परंपरा के अनुसार, यह वह स्थान है जहां साधक मां महामशानी की कृपा से सिद्धि प्राप्त करते हैं।

पूजा का आयोजन स्वामी आगमानंद जी महाराज के सानिध्य में होता है, जबकि शिवशक्ति योग पीठ के अध्यक्ष अनिमेष जी पूरे अनुष्ठान का संयोजन करते हैं।
पूरी रात भक्ति, साधना, और शक्ति आराधना का वातावरण बना रहता है।
श्रद्धालु यहां आकर न केवल पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि मां महामशानी के दर्शन मात्र से ही मनोवांछित फल प्राप्त होने की कामना करते हैं।


🌸 काली पूजा पर दस हजार से अधिक खप्पर चढ़ाने की परंपरा

काली पूजा के अवसर पर बैसी काली मंदिर और नगरह दोनों ही स्थानों पर विशाल श्रद्धालु समागम होता है।
हर वर्ष यहां दस हजार से अधिक भक्त मां काली को खप्पर चढ़ाते हैं, जो इस क्षेत्र की अनूठी परंपरा है।
यह खप्पर चढ़ाने की रस्म कटिहार से लेकर बेगूसराय तक के जिलों से आए भक्तों को एक सूत्र में बांध देती है।
पूजा समिति के सदस्य ने बताया कि इस वर्ष 30 अक्टूबर की देर रात मां काली की प्रतिमा वेदी पर स्थापित की जाएगी।
इसके बाद पूरी रात विशेष तंत्र साधना, भजन-कीर्तन और देवी जागरण कार्यक्रम आयोजित होंगे।


🙏 श्रद्धा और शक्ति का अद्भुत संगम

बैसी काली मंदिर और नगरह महामशानी शक्तिपीठ आज केवल पूजा-अर्चना के स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा और तांत्रिक परंपरा के जीवंत प्रतीक हैं।
यहां हर वर्ष हजारों लोग आते हैं, जो मां से शक्ति, शांति और सिद्धि की कामना करते हैं।
नवगछिया के लिए यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और लोक आस्था का उत्सव बन चुका है।

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By न्यूज़ डेस्क

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