नवगछिया। बिहपुर प्रखंड के बिहपुर दक्षिण पंचायत स्थित सोनवर्षा गांव में शुक्रवार सुबह इंसानियत की एक मिसाल देखने को मिली। घास के खेत में लावारिस हालत में मिले एक नवजात शिशु को गांव के एक परिवार ने अपनाने का फैसला किया। परिवार ने बच्चे को भगवान का आशीर्वाद बताते हुए उसका नाम ‘आर्यन’ रखा है। इस घटना की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।
घास काटने गई महिला ने सुनी रोने की आवाज
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब सात बजे सोनवर्षा गांव के छर्रापाटी टोला के पीछे बहियार में एक महिला अपने बेटे के साथ घास काटने गई थी। इसी दौरान उसे नवजात के रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज की दिशा में पहुंचने पर घास के बीच एक नवजात शिशु लावारिस हालत में पड़ा मिला।
महिला ने तत्काल बच्चे को सुरक्षित उठाकर घर पहुंचाया। इसके बाद आशा कार्यकर्ता की मदद से नवजात को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

डॉक्टरों ने बताया स्वस्थ
अस्पताल में चिकित्सकों ने नवजात की जांच की। जांच के बाद बच्चे की हालत सामान्य पाई गई। प्राथमिक उपचार के बाद उसे वापस घर लाया गया, जहां उसकी देखभाल शुरू कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर अस्पताल पहुंचाने से नवजात की जान बच गई।
बिट्टू मंडल ने कहा— यह भगवान का आशीर्वाद है
नवजात को अपने घर लाने वाले बिट्टू मंडल ने कहा कि जिसने भी बच्चे को छोड़ा हो, लेकिन उनके परिवार के लिए यह भगवान का आशीर्वाद है। उन्होंने घोषणा की कि अब यह बच्चा उनके परिवार का सदस्य रहेगा। परिवार ने उसका नाम ‘आर्यन’ रखा और इस खुशी में मिठाइयां भी बांटीं।
इलाके में बनी चर्चा का विषय
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग बिट्टू मंडल के घर पहुंचने लगे। ग्रामीणों ने परिवार के इस फैसले की सराहना करते हुए इसे मानवता की मिसाल बताया। साथ ही लोगों ने नवजात को इस तरह खेत में छोड़ने की घटना पर चिंता भी जताई।
उधर, ऐसे मामलों में पुलिस और बाल संरक्षण विभाग द्वारा कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की जाती है, ताकि बच्चे की सुरक्षा और भविष्य से जुड़े सभी आवश्यक कदम सुनिश्चित किए जा सकें।
By न्यूज़ डेस्क
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