भागलपुर। ऐतिहासिक अंग की धरती एक बार फिर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का स्वागत करने के लिए तैयार है। करीब नौ वर्ष के लंबे अंतराल के बाद भागलपुर में दूसरी बार देश के राष्ट्रपति का आगमन होने जा रहा है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, 2 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भागलपुर पहुंचेंगी। इस दौरान वह तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के प्रशासनिक भवन परिसर में स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक अमर शहीद वीर तिलकामांझी की आदमकद प्रतिमा का अनावरण करेंगी।

इस प्रस्तावित दौरे को भागलपुर और टीएमबीयू के इतिहास में महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु टीएमबीयू परिसर में कदम रखने वाली पहली राष्ट्रपति होंगी।

2017 में प्रणब मुखर्जी पहुंचे थे विक्रमशिला

भागलपुर में इससे पहले वर्ष 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का आगमन हुआ था। 3 अप्रैल 2017 को उन्होंने कहलगांव स्थित प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुरावशेषों का अवलोकन किया था।

जहां प्रणब मुखर्जी ने अंग क्षेत्र की प्राचीन शैक्षणिक विरासत और विक्रमशिला के इतिहास को करीब से देखा था, वहीं अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु स्वतंत्रता संग्राम के महानायक वीर तिलकामांझी की स्मृति और विरासत से जुड़ेंगी।

इस लिहाज से दोनों राष्ट्रपति के भागलपुर दौरे ऐतिहासिक रूप से अलग-अलग महत्व रखते हैं।

2024 की सीनेट बैठक से शुरू हुई प्रतिमा स्थापना की मुहिम

वीर तिलकामांझी की प्रतिमा को विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित करने की पहल वर्ष 2024 की सीनेट बैठक से शुरू हुई थी। अमर शहीद तिलकामांझी प्रतिमा स्थापना समिति के सचिव डॉ. मृत्युंजय सिंह गंगा के अनुसार, तत्कालीन सिंडिकेट सदस्य सह एमएलसी डॉ. संजीव सिंह ने विश्वविद्यालय परिसर में वीर तिलकामांझी की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था।

इसके बाद विश्वविद्यालय स्तर पर उच्चस्तरीय निर्माण समिति का गठन किया गया। प्रतिमा का निर्माण पूरा होने के बाद इसे राष्ट्रपति के हाथों लोकार्पित कराने की पहल शुरू हुई।

राष्ट्रपति ने जताई वीर तिलकामांझी के प्रति श्रद्धा

प्रतिमा निर्माण के बाद तत्कालीन कुलपति प्रो. जवाहर लाल की राजभवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात हुई। इस दौरान जब राष्ट्रपति को पता चला कि कुलपति तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से जुड़े हैं, तो उन्होंने वीर तिलकामांझी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

इसके बाद कुलपति ने राष्ट्रपति भवन जाकर उन्हें भागलपुर आने का औपचारिक निमंत्रण दिया, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया। हालांकि, क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ के कारण उस समय प्रस्तावित दौरा स्थगित करना पड़ा था।

बाद में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली जाकर राष्ट्रपति से मुलाकात की और भागलपुर आगमन का पुनः आग्रह किया। इसके बाद 2 सितंबर की प्रस्तावित तिथि तय हुई।

राष्ट्रपति के प्रस्तावित आगमन को लेकर विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन स्तर पर तैयारियां तेज होने की उम्मीद है। वीर तिलकामांझी की प्रतिमा का राष्ट्रपति के हाथों अनावरण भागलपुर के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर होगा।

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By न्यूज़ डेस्क

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