भागलपुर। गंगा के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ को देखते हुए विक्रमशिला सेतु पर 29 अगस्त से प्रस्तावित आवागमन बंद करने के फैसले को फिलहाल टाल दिया गया है। इससे पूर्व बिहार की बड़ी आबादी को राहत मिली है। नई तिथि तय होने तक सेतु पर वाहनों का परिचालन पूर्ववत जारी रहेगा।
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शनिवार को पटना में हुई उच्चस्तरीय बैठक में विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन कार्य की तिथि आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। सोमवार को पथ निर्माण विभाग के सचिव के दिल्ली से लौटने के बाद नई तिथि पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार ने बताया कि गंगा के बढ़ते जलस्तर, संभावित बाढ़ और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सेतु के पुनर्स्थापन कार्य की तिथि आगे बढ़ाई जा रही है। इसकी सूचना बीआरओ को भी दे दी गई है। उन्होंने सेतु को दो हिस्सों में बांटकर पुनर्स्थापन कार्य कराने संबंधी किसी निर्णय से इनकार किया।

बाढ़ की स्थिति में आ सकती है तकनीकी परेशानी
पुल निर्माण निगम के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार उफनती गंगा के बीच सेतु के पुनर्स्थापन कार्य में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। यदि सेतु को बंद किया जाता है तो भागलपुर-नवगछिया के बीच आवागमन प्रभावित होने के साथ बड़ी आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा 28 अगस्त तक श्रावणी मेला भी चल रहा है। नवगछिया, कटिहार, सहरसा, बेगूसराय, पूर्णिया, मधेपुरा और सिलीगुड़ी समेत विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कांवरिया बाबाधाम की यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में सेतु बंद होने से श्रद्धालुओं और आम यात्रियों को भी परेशानी हो सकती थी।
अधिकारियों के अनुसार गंगा का जलस्तर कम होने के बाद ही पुनर्स्थापन कार्य की नई तिथि तय की जाएगी। मौजूदा परिस्थितियों और आम लोगों की परेशानी को देखते हुए फिलहाल काम टालने का निर्णय लिया गया है।
क्षतिग्रस्त हिस्से में बनेगा ट्रस स्ट्रक्चर
विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन कार्य के दौरान क्षतिग्रस्त हिस्से पर नए स्लैब लगाए जाएंगे। इसके साथ ही करीब 35 मीटर लंबा स्टील ट्रस ब्रिज तैयार किया जाना है। नवगछिया की ओर 12 मीटर तथा भागलपुर की ओर 24-24 मीटर के हिस्से में भी ट्रस स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इससे पहले संबंधित हिस्सों में स्टील गर्डर लगाए जाएंगे।
पुनर्स्थापन के दौरान बेयरिंग और एक्सपेंशन ज्वाइंट भी बदले जाएंगे। पूरे कार्य में करीब तीन महीने लगने का अनुमान है। काम पूरा होने के बाद विक्रमशिला सेतु पर दो लेन में वाहनों का परिचालन फिर शुरू किया जाएगा। योजना के अनुसार भविष्य में सेतु पर 30 टन तक वजन वाले वाहनों के परिचालन की अनुमति होगी।
