वीडियो कॉल पर पिता से कहा था ‘सब ठीक है’, दो घंटे बाद मिली बेटे की मौत की खबर
नवगछिया। ट्रिपल आईटी रांची में प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य कुमार (19) की मौत से परिवार सदमे में है। बेटे की मौत के बाद पिता विष्णुदेव कुमार ने संस्थान के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि घटना के बाद आदित्य को हॉस्टल के कमरे से नीचे लाने और उसे समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में लापरवाही बरती गई। उन्होंने संस्थान के निदेशक संजीव श्रीवास्तव, प्रबंधक और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है।
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परिजनों के अनुसार, आदित्य ने मौत से करीब दो घंटे पहले हॉस्टल से अपने पिता को वीडियो कॉल किया था। बातचीत के दौरान उसने कहा था कि सब ठीक है। उस समय पिता को बातचीत में ऐसा कुछ महसूस नहीं हुआ, जिससे किसी अनहोनी की आशंका होती। लेकिन करीब दो घंटे बाद आदित्य के दोस्त का फोन आया और उसने बताया कि आदित्य अब उनके बीच नहीं रहा। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
महानंदा एक्सप्रेस से पटना पहुंचे, फिर रांची गए पिता
बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद विष्णुदेव कुमार अपने भाई बालकरण और अन्य परिजनों के साथ महानंदा एक्सप्रेस से पटना पहुंचे। वहां से वे रांची गए। सोमवार की सुबह परिजन आदित्य का शव लेकर नवगछिया पहुंचे। इसके बाद महादेवपुर घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

आदित्य की मौत से परिवार में मातम पसरा है। पिता का कहना है कि उनके बेटे के साथ क्या हुआ, इसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों की भूमिका निर्धारित करने की मांग की है।
हॉस्टल की सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था पर उठाए सवाल
विष्णुदेव कुमार ने ट्रिपल आईटी प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि हॉस्टल में सुरक्षा, आपातकालीन चिकित्सा सहायता और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर कथित लापरवाही बरती गई। उन्होंने कहा कि घटना के बाद छात्र को कमरे से नीचे लाने और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में भी देरी हुई।
पिता ने संस्थान के निदेशक संजीव श्रीवास्तव, प्रबंधक और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए, ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों का पता चल सके और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो।
हालांकि, परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संस्थान प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
कमरे में चालू था कंप्यूटर, खुली थी किताब
परिजनों ने बताया कि जब वे आदित्य के कमरे में पहुंचे तो उसका कंप्यूटर चालू था और किताब खुली हुई थी। संस्थान में इंटरनल टेस्ट चल रहे थे। आदित्य के दो टेस्ट हो चुके थे, जबकि 12 तारीख को एक और टेस्ट होना बाकी था।
परिजनों के मुताबिक, पढ़ाई से जुड़े सामान की स्थिति देखकर उनके मन में कई सवाल उठे हैं। वे जानना चाहते हैं कि घटना से पहले क्या हुआ था और हॉस्टल में उस समय क्या परिस्थितियां थीं। परिवार का कहना है कि इन सवालों के जवाब जांच के जरिए सामने आने चाहिए।
शनिवार को बिरयानी खाने की बात बताई थी
विष्णुदेव कुमार ने बताया कि शनिवार को उन्होंने आदित्य से फोन पर पूछा था कि उसने क्या खाया है। इस पर बेटे ने जवाब दिया था कि उसने बिरयानी खाई है। पिता के अनुसार, बातचीत सामान्य थी और उन्हें किसी परेशानी या अनहोनी की आशंका नहीं हुई।
इसके बाद आदित्य से संपर्क नहीं हो पाया। फिर दोस्त के फोन से उसकी मौत की जानकारी मिली। पिता के लिए यह समझना मुश्किल है कि सामान्य बातचीत के कुछ समय बाद ऐसी घटना कैसे हो गई। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जांच कराने की मांग की है।
कमरे का दरवाजा अंदर से बंद होने की बात
परिजनों के अनुसार, रांची में मौजूद छात्रों ने उन्हें बताया कि बिजली जाने के बाद अंधेरे में यह घटना हुई। छात्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जब लोग आदित्य के कमरे पर पहुंचे तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी आवाज लगाने के बावजूद दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया, जहां आदित्य पंखे से लटका मिला।
यह विवरण परिजनों को छात्रों से मिली जानकारी पर आधारित है। घटना की परिस्थितियों और उससे जुड़े अन्य तथ्यों की आधिकारिक जांच से पुष्टि होना आवश्यक है।
थाने में आवेदन, यूडी केस दर्ज
विष्णुदेव कुमार ने बताया कि घटना के बाद परिजनों ने नजदीकी थाने में आवेदन दिया था। इसके आधार पर यूडी केस दर्ज किया गया। हालांकि, परिजन इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाए और जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने लाई जाए।
परिवार का कहना है कि केवल यूडी केस दर्ज होने से उनके सवालों का जवाब नहीं मिल रहा है। वे चाहते हैं कि हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन प्रतिक्रिया और घटना के समय उपलब्ध कराई गई चिकित्सा सहायता की भी जांच हो।
पूर्णिया के रहने वाले हैं आदित्य के परिजन
परिवार मूल रूप से पूर्णिया जिले के रामबाग नया टोला का रहने वाला है। वर्ष 2010 में विष्णुदेव कुमार ने नवगछिया के मखातकिया में घर बनाकर रहना शुरू किया था। वे पटना में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं।
एक ओर परिवार अपने बेटे को खोने के गहरे सदमे से गुजर रहा है, वहीं दूसरी ओर घटना की परिस्थितियों को लेकर जवाब चाहता है। पिता ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
मंगलवार शाम नवगछिया बाजार में निकलेगा कैंडल मार्च
आदित्य की मौत के मामले में न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर मंगलवार शाम पांच बजे नवगछिया बाजार में कैंडल मार्च निकाला जाएगा। इसके जरिए छात्र की मौत की परिस्थितियों की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई जाएगी।
फिलहाल, परिवार की मुख्य मांग है कि आदित्य की मौत से जुड़े सभी सवालों का जवाब मिले। घटना की वास्तविक परिस्थितियां, हॉस्टल प्रबंधन की भूमिका और आपातकालीन सहायता में किसी प्रकार की चूक हुई या नहीं, इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
