नवगछिया : समोसा की बात हो और बजरंगी का समोसा का नाम न हो … नवगछिया का कोई एेसा गावं या मोहल्ला एेसा कोना नहीं होगा, जहां इस समोसा की डिमांड नहीं। शहरों की बात छोड़िये, ये गांवों में भी मशहूर है। यह एक एेसा समोशा है, जो सबूत है कि ग्लोबलाइजेशन जैसी कोई नई चीज़ नहीं है, समोसा खाने के बाद आपको समझ जाना चाहिए कि किसी चीज़ की पहचान जगह की सीमा से तय नहीं होती है।
समोशा के नाम पर सबसे पहले हमारे जेहन में कुछ आता है तो वह है-गर्म समोसा, जो कहीं भी, कभी भी आसानी से मिल जाता है। नवगछिया के तो हर कोने-हर मुहल्ले में एेसी तमाम दुकानें मिल जाएंगी, जहां भीड़ लगी रहती है समोसे के लिए। आपमें से ज्यादातर लोग जानते होंगे कि यह नवगछिया का समोशा है जिसे लोग बहुत पसंद करते हैं,
अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग तरह के समोसे मिलते हैं। यहां तक कि एक ही बाज़ार में अलग-अलग दुकानों पर मिलने वाले समोसे के स्वाद में भी अंतर होता है। कभी-कभी यह इतना बड़ा होता है कि लगता है कि पूरा खाना एक समोसे में ही निपट जाएगा। समय के साथ समोसा शादियों में होने वाले भोज और पार्टियों का हिस्सा तक बन गया।
क्या कहते है बजरंग (समोशा वाले)
बजरग का कहना है है वो कभी क्लालिटी से कोई समझोता नहीं करते है चाहे कितनी भी आलू के मसाले महंगा- सस्ता क्यों न हो वो सुबह से ही समोसा बनाने के काम में जुट जाते दिन भर के कड़ी मेहनत के बाद वो शाम ४ बजे समोशा को लेकर बाजार कृष्णा टॉकिज चौक आते है वहा पर सिर्फ छकने का काम होता है लोग पहले से ही इंतजार में रहते है
बताते चले कि नवगछिया में बजरंग का समोशा बहुत ही फेमस है कई बार लोगो को आधा-आधा घंटा समोशा के लिए रुकना पड़ता है तब जाकर लोगो का नंबर आता है